बहन ने भाभी की दिलवाई
बहन ने भाभी की दिलवाई
प्रेषक : अक्षत
हाय दोस्तो, मेरा नाम अक्षत है और मैं बिलासपुर छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ। अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है। मैं इस साईट को 5 साल से पढ़ रहा हूँ।
अब कहानी की ओर बढ़ते हैं जिसको पढ़ कर आपको फ़ैसला करना कि यह आपको सच्ची लगती है या नहीं।
मेरी उमर 22 साल है। मैं औरों की तरह यह नहीं कहूँगा कि मेरा लंड 7 इंच का है या मैं बहुत ही ज्यादा खूबसूरत हूँ या ऐसा कुछ भी।
मैं दिखने में बहुत ज्यादा तो नहीं पर ठीकठाक हूँ, मेरा लंड भी सामान्य आकार का है, जैसा सच में औरों का रहता है। सच कहूँ तो किस्मत से काफी लड़कियाँ भी पटा चुका हूँ लेकिन कभी उन्हें आराम से चोदने का मौका ही नहीं मिल पाता था।
मतलब हमेशा मेरी किस्मत में के.एल.पी.डी. ही मिलता था। हमेशा जब भी चोदने की बारी आती है, तब किसी न किसी कारण से मेरा काम नहीं हो पाता। फिर एक दिन मेरी किस्मत चचेरी बहन रीमा से खुली, मेरा मतलब उसके द्वारा खुली।
बात 3 महीने पहले की है, रीमा जो बिलासपुर में ही रहती है, उसका फोन आया- अक्षत, तू कहाँ है, मेरे को तेरे से एक काम है।
मैं बोला- मैं अभी शॉप पर हूँ। थोड़ी देर में मिलता हूँ।
फिर शाम को मैं रीमा के घर गया तो वो वहाँ नहीं थी। चाची से पूछने पर पता चला कि वो सामने वाली भाभी के घर 3 घण्टे से गई हुई है।
उन्होंने बताया- पड़ोस में एक महीने पहले ही एक कपल रहने आया है, और लड़की का नाम नेहा है। रीमा की आजकल उससे बहुत पटती है, सारा दिन उसी से बातें करती रहती है।
फिर मैंने रीमा को कॉल किया तो वो मुझे लेने आई और बोली- मेरे साथ चल।
फिर मैं उसके साथ नेहा भाभी के यहाँ चला गया। उसने मुझे नेहा भाभी से मिलवाया और कहा- अक्षत, ये नेहा भाभी हैं। ये अंबिकापुर से हैं और इनके हसबैंड की जॉब यहाँ लगी है, तो ये दोनों यहीं रह रहे हैं।
पर मेरा ध्यान रीमा की बात पर नहीं सिर्फ नेहा की तरफ था।
“बाप रे ! बता नहीं सकता कि क्या चीज़ थी वो ! इतनी खूबसूरत कि क्या कहूँ ! बस इतना कहूँगा कि मैं चाह कर भी उनसे नजरें नहीं हटा पा रहा था।”
फिर अचानक रीमा बोली- कहाँ ध्यान है तेरा?
मैं बोला- कहीं नहीं !
तो फिर रीमा ने हम दोनों का परिचय करवाया और रीमा बोली- अक्षत, मैं तो तेरे को जिस काम के लिए बुलाया था, वो तो बताना ही भूल गई। नेहा भाभी के पास एक मिनी लैपटॉप है उसे बिकवा कर एक अच्छा लैपटॉप लेना है।
तो फिर रीमा ने हम दोनों का परिचय करवाया और रीमा बोली- अक्षत, मैं तो तेरे को जिस काम के लिए बुलाया था, वो तो बताना ही भूल गई। नेहा भाभी के पास एक मिनी लैपटॉप है उसे बिकवा कर एक अच्छा लैपटॉप लेना है।
मैं बोला- ठीक है, अगर कोई होगा तो बताऊँगा।
कह कर मैं वहाँ से निकल गया। उसने मुझसे इसलिए कहा क्योंकि मेरे टच में ऐसे कस्टमर ज्यादा रहते हैं, मेरी मोबाइल की और रिपेयरिंग की ही दुकान है।
कह कर मैं वहाँ से निकल गया। उसने मुझसे इसलिए कहा क्योंकि मेरे टच में ऐसे कस्टमर ज्यादा रहते हैं, मेरी मोबाइल की और रिपेयरिंग की ही दुकान है।
वैसे मेरा ध्यान तो सिर्फ नेहा भाभी पर ही था। उस रात को मैंने भाभी के नाम की मुठ मारी, तब जाकर कहीं मुझे आराम मिला।
करीब तीन दिन बाद मेरी दुकान में एक बन्दा आया जिसे एक सेकेंड हैण्ड लैपटॉप चाहिए था।
मैं तुरंत रीमा को कॉल किया लेकिन उसका मोबाइल ‘नोट-रीचेबल’ था तो मैंने चाची को कॉल किया तो पता चला कि वो कोचिंग गई है।
मैं तुरंत बाइक उठा कर नेहा भाभी के पास चला गया, उनके घर जाकर डोर-बेल बजाई तो नेहा भाभी निकलीं।
उन्होंने मुझे देखते ही कहा- अरे अक्षत तुम ! आओ अन्दर आओ।
मैं अंदर चला गया। घर पर वो अकेली थीं, तो मैंने पूछा- भैया कहाँ हैं?
तो उन्होंने कहा- भैया एक कॉस्मेटिक कम्पनी में एस.ओ. की पोस्ट पर हैं तो उन्हें महीने में 20-22 दिन बाहर रहना पड़ता है। मेरी ख़ुशी का तो मानो ठिकाना ही ना रहा।
मैंने तुरंत मन में सोचा कि बेटा अक्षत तेरी दाल यहाँ गल सकती है। मैं तुरंत मन में ही उसे पटाने का तरीका सोचने लगा।
तभी वो बोली- बैठो अक्षत, मैं चाय बना कर लाती हूँ।
मैंने कहा- ओके भाभी !
और सोफे पर बैठ गया।
और सोफे पर बैठ गया।
5 मिनट बाद वो चाय और स्नेक्स लेकर आ गईं और मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गईं। फिर हम दोनों ने चाय पी।
मैंने कहा- भाभी मैं आपका लैपटॉप लेने आया हूँ। उसके लिए मैंने एक कस्टमर ढूंढ लिया है, आप मुझे अपना लैपटॉप दे दो। मैं कल उसे दिखा दूंगा।
तो उन्होंने हिचकिचाते हुए मुझे लैपटॉप पकड़ा दिया।
मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी? कुछ परेशानी है क्या?
उन्होंने कहा- इसमें मेरी कुछ पर्सनल डॉक्यूमेंट हैं।
मैंने कहा- ठीक है। उन्हें आप किसी पेनड्राइव में मूव कर लो।
तो उन्होंने कुछ सोचा और कहा- कोई बात नहीं, तुम कल उसे देने के पहले एक बार मेरे पास ले आना।
मैंने ‘ओके’ कहा और उनका नंबर लेकर वहाँ से निकल आया। रात को उनके लैपटॉप को ऑन किया और मैं कंप्यूटर सारे फ़ोल्डर्स चेक करने लगा, और वही हुआ जिसका मुझे अंदाज़ा था। उनकी पर्सनल डॉक्यूमेंट मतलब ब्लू फिल्म्स से था।
मैं तो देखता ही रह गया ! क्या कलेक्शन था ! उनके पास ब्लू फिल्म्स और सारी की सारी फुल एच.डी. में।
मैंने रात 2 बजे तक फिल्म्स देखीं और आखिर में भाभी के नाम की मुठ मार कर सो गया। सुबह उस कस्टमर को मैंने लैपटॉप दिखाया तो उसे वो पसंद नहीं आया।
मैंने भाभी को कॉल करके यह बात बताई तो उन्होंने कहा- कोई बात नहीं तुम शाम को लैपटॉप वापस ले आना और आते टाइम उसमें कुछ नए गाने भी डाल देना प्लीज।
मैंने कहा- ओके।
और शाम उनके घर जाने के पहले उनके लैपटॉप में गाने डाल दिए और डेस्कटॉप पर जानबूझ कर एक ब्लू फिल्म मूव कर दी, गाने वाले फोल्डर में ही। और उनके घर की तरफ चल पड़ा। घर पहुँच कर ‘डोर-बेल’ बजाई तो भाभी ने दरवाजा खोला।
और मेरी आंखे फटी की फटी रह गईं। भाभी ने सफ़ेद टॉप और ब्लू-जीन्स पहन रखी थी।
वो उस ड्रेस में क्या कयामत लग रही थी ! बयां नहीं कर सकता।
गुलाबी लिप-ग्लौस देख कर लग रहा था कि अभी इन्हें पकड़ कर चूस लूँ। वक्ष के उभार भी एकदम सम्पूर्ण आकार के, न ज्यादा छोटे, ना ज्यादा बड़े और नितम्ब तो अलग से निकले हुए साफ़ दिख रहे थे। मैं तो उन्हें देख कर पागल हुए जा रहा था।
मैंने पूछा- क्या बात है भाभी? आज इतना संवर कर कहाँ जा रही हो? बहुत हॉट दिख रही हो इस ड्रेस में।
तो उन्होंने एक कँटीली हंसी दी और थैंक्स कहा और कहा- कहीं जा नहीं बल्कि मार्किट से आ रही हूँ।
और फिर मैंने उन्हें उनका लैपटॉप दे कर कहा- लो भाभी इसमें मैंने नए गाने भी डाल दिए हैं। आप देख लो।
उन्होंने लैपटॉप ऑन करके विडियो सोंग्स वाला फोल्डर खोला और सोंग चालू कर दिया और नेक्स्ट बटन दबा-दबा कर सोंग्स चेक कर रही थीं कि अचानक एक एडल्ट क्लिप चालू हो गई जिसमें लड़की लड़के का लंड चूस रही थी।
मैंने झट से वो क्लिप बंद की और कहा- सॉरी भाभी, पता नहीं कैसे यह क्लिप इसमें डल गई।
उस क्लिप को बंद करने के चलते मैं भाभी के इतना करीब आ गया था कि भाभी की गरम साँसें मुझे महसूस हो रही थीं, और हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में डूब गए थे। कुछ सेकंड बाद मैं उनके रसीले होंठों की तरफ बढ़ा और मैं उन्हें चूमने ही वाला था कि उन्होंने मुझे पीछे धकेल दिया और मैं नीचे गिर गया जिससे मुझे मेज का कोना लग गया और खून निकलने लगा।
वो मेरे पास आकर बोलीं- ओह सॉरी अक्षत, मेरी वजह से तुम्हें लग गई।
मैंने ऊपरी गुस्सा दिखाया- मैं जा रहा हूँ, आप बहुत बुरी हो।
वो बोलीं- अक्षत यह गलत है, हमें आगे नहीं बढ़ना चाहिए। किसी को पता चल गया तो मेरी खूब बदनामी होगी।
मैंने कहा- आप बताओगे किसी को?
वो बोली- नहीं।
तो मैं बोला- न आप बोलोगे, ना मैं, तो किसी को कैसे पता चलेगा?
फिर वो बोली- उठो पहले तुम्हें बैन्डेड लगा दूँ।
वो फर्स्ट ऐड बॉक्स ले आई और बड़े प्यार से मेरे हाथ में पट्टी लगाने लगी और मैं दूसरे हाथ से उसके बाल सहलाने लगा।
उन्होंने मुझे एक कँटीली मुस्कान दी।
मैं समझ गया रास्ता साफ़ है। जैसे ही उन्होंने मुझे पट्टी लगा ली, मैं उनकी तरफ बढ़ा और दूसरे ही पल उनके होंठ और मेरे होंठ एक दूसरे को चूस रहे थे। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
क्या रसीले होंठ थे यार ! उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ खेल रही थी।
अब मैं आकर सोफे पर बैठ गया और वो मेरे सामने खड़ी होकर मेरी ओर धीरे-धीरे झुक रही थी और फिर मेरी गोद में बैठ कर मुझसे प्रगाढ़ चुम्बन करने लगी जैसे एक प्रेयसी प्यार करती है। सचमुच इतना मज़ा तो मुझे इससे पहले किसी ‘किशोरी’ के साथ भी नहीं आया था।
और अब मैं उनके गले पर हल्के-हल्के से काट कर चूम रहा था। वो बहुत गर्म हो चुकी थी।
मैंने कहा- भाभी, अब आप अपना अपने कपड़े उतारो।
वो झट से मान गई और अपने हाथ ऊपर करके बड़े सेक्सी ढंग से बोली- तुम खुद ही उतार लो ना !
मैंने झट से उनका टॉप उतार दिया। अन्दर उन्होंने काली ब्रा पहन रखी थी जिस पर पारदर्शी पट्टियाँ लगी थी। आग लग रही थी और फिर मैंने ब्रा पहने हुए ही, उन्हें एक बार जम कर चूम लिया और पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया। उनकी टाइट ब्रा से दोनों कबूतर बाहर उछाल मार कर बाहर आ पड़े।
लेकिन मैंने देखा कि यह क्या? ये तो झूला-झूल कदम के फूल हैं (लटके हुए) मैंने मन में सोचा लगता है, साली बुबुओं को रोज गंदे तरीके से मसलती दबाती है।
खैर इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। अब एक स्तन को में मुँह में लेकर खूब चूस रहा और दांत गड़ा रहा था और दूसरे वाले को अपने हाथों से मसल-मसल कर लाल कर दिया था। अब उनकी बारी थी, मेरे कपड़े उतारने की।
उन्होंने धीरे-धीरे करके मेरे सारे कपड़े उतार दिए। अब मैं बस अंडरवियर में था और वह मुझे बेतहाशा चूमने लगी। मुझे भी अब जोश आ गया। वो मेरे लंड को ऊपर से ही पकड़ कर हिला रही थी।
फिर मैंने अपना अंडरवियर भी उतार दिया और अब मेरा लंड नेहा के कोमल-कोमल हाथों में था। मैंने भी देर ना करते तुरन्त नेहा की जीन्स की तरफ हमला बोला और उसकी जीन्स और पैन्टी एक ही झटके में उतार दी और मुझे उसकी प्यारी सी चूत का दीदार हो गया जो पूरी भीग चुकी थी। अब हम दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था।
उसने उसी हालत में मुझे बोला- चलो बेडरूम में चलते हैं।
और बेडरूम में पहुँच कर उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया, खुद मेरे ऊपर आ गई और अपनी चूत में मेरा लंड को सेट करने लगी।
मैंने मन ही मन सोचा कि साला में इसे चोद रहा हूँ कि वो मुझे।
मैंने तुरंत उसे ऊपर से हटाया ताकि उसे और तड़पा सकूँ। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर अपने ऊपर से नीचे पटका और कहा- क्या बात है भाभी, बड़ी जल्दी में लग रही हो?
और खुद उसके ऊपर 69 के पोज़ में आ गया। अब वो मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थीं और मैं उसकी चूत के अन्दर जीभ घुसा घुसा कर उसे मजे दे रहा था। बीच में जब भी वो मेरे लंड पर हल्का सा काट देती, बदले में मैं भी उसकी चूत के दाने को काट देता और दोनों एक साथ चीख पड़ते।
यह खेल करीब दस मिनट तक चला जिस पर दो बार वो और एक बार मैं झड़ा। उसके बाद हम साथ में जाकर नहाए। करीब 20 मिनट तक बाथरूम में एक-दूसरे के अंगों से खेलने के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।
अब उसने दो टूक कहा- अब बहुत हुआ अक्षत ! अब अपने लंड को डालो मेरे अन्दर और चोदो मुझे।
इस पर हम दोनों बाथरूम से बाहर आ गए।
इस पर हम दोनों बाथरूम से बाहर आ गए।
मैंने भी सोचा बहुत तड़पा लिया उसे, अब डाल ही दूँ तो उसे अब वापस बेड के पास ले गया। पर बेड तो हम दोनों के माल से भीग चुका था और उसका सारा माल बेड पर फ़ैला हुआ था। तो उसने ऊपर की शीट हटा दी और बेड के ऊपर लेट गई।
मैं उसके ऊपर आ गया और उसकी चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया। उसके मुँह से एक दबी सी आवाज निकली। मेरा लंड एक बार में ही अन्दर चला गया। अब लंड अंदर-बाहर हो रहा था।
उसके मुँह से, “आह… ओ… आ… आह… अम्म…” जैसी आवाजें निकल रही थीं।
“क्या नजारा बन रहा था यार !”
उसे चोदने मे खूब मज़ा आ रहा था। अब उसे उसी अवस्था में घुमा कर अपने ऊपर ले आया। अब वो उचक-उचक कर चुद रही थी, पर इस बार उसके मुँह से नही बल्कि मेरे मुँह से आवाजें निकलनी शुरू हो गईं क्योंकि उसकी रफ्तार इतनी तेज थी कि मेरा लंड दुखने लगा था पर मज़ा भी खूब आ रहा था।
करीब 10 से 15 मिनट की चुदाई के बाद मेरा और उसका दोनों का साथ में माल निकल गया। हमारा चूत चुदाई का खेल यहीं समाप्त हुआ। फिर घड़ी के तरफ टाइम देखा तो 7 बजने वाले थे।
मैंने बोला- ठीक है भाभी, मैं चलता हूँ।
और जाते-जाते उन्होंने मुझे एक प्यारी सी पप्पी भी दी। इसके बाद भी मैंने उन्हें खूब चोदा और मुझे लगता है कि नेहा भाभी ने रीमा को यह बता दिया है। पर मेरी कभी भी रीमा से इस विषय में बात नहीं हुई।
तो दोस्तो, मेरी कहानी कैसी लगी। मुझे जरूर मेल करिएगा।
पड़ोसन की प्यास और मेरे मजे! पूरी कहानी पढ़े
ReplyDeleteThanks for sharing antervasna interesting story.
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आयुर्वेदिक कैप्सूल एवं तैल
( समस्याओं से छुटकारा पाएँ स्थायी रुप में )
इस दवा का मानव शरीर पर कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि इसे मैं खुद तैयार करता हूँ
( दवा डाक द्वारा भेजी जाती है )
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