पुलिस वाले ने मुझे सैट करके मेरी चूत चोद दी- 1 (Sex Stories In Hindi)

 


सेक्स स्टोरीज इन हिंदी अगर लड़की ने अपनी दास्ताँ लिखी हो तो मजा कई गुणा बढ़ जाता है. यह सेक्स कहानी एक शादीशुदा भाभी ने लिखी है कि वह कैसे पराये आदमी से चुद गयी.


दोस्तो, आज मैं आपको एक सच्ची घटना या कहें कि मेरे साथ घटी दास्तान को सेक्स स्टोरीज इन हिंदी की एक कड़ी के रूप में लिख कर बता रही हूँ.


मेरा नाम प्रिया है, उम्र 32 साल है. मेरी शादी राज से 6 साल पहले हुई थी.


शादी के कुछ दिनों बाद ही मैं अपने पति के साथ भोपाल में रहने लगी, जहां मेरे पति नौकरी करते हैं.

हम लोग हंसी-खुशी रहने लगे.


हालांकि हमारी सेक्स लाइफ सामान्य ही चल रही थी.

करीब 6 महीने पहले हमने अपना खुद का घर बनवाया और वहां शिफ्ट हो गए.


मैं अपने बारे में बता देती हूँ.

मेरी हाइट 5 फीट 2 इंच, रंग एकदम गोरा, चेहरा काफी सुंदर और फिगर भी एकदम जानलेवा 34-30-36 है … जबकि ब्रा का साइज 34D है.


आप समझ ही गए होंगे कि मेरे बूब्स और गांड की खूबसूरती कैसी है.

इनके बारे में मुझे शायद कुछ भी कहना जरूरी नहीं है.


शादी के इतने सालों बाद भी मेरे बूब्स अभी भी टाइट हैं क्योंकि मैं अपने पति को ज्यादा अपने बूब्स से खेलने नहीं देती.


मेरी गांड भी हल्की-सी उभरी हुई है, जो टाइट कपड़ों में साफ नजर आती है.

मेरे बाल भी लंबे हैं.


हमेशा तो नहीं, लेकिन कभी-कभार सज-संवर कर रहना मुझे पसंद है, जो मेरा पैशन ही समझिए.

लेकिन मुझे ये बिल्कुल पसंद नहीं कि कोई मुझे छेड़े.


हालांकि आते-जाते कई लोग मुझे घूरते हैं और कुछ तो कमेंट्स भी करते हैं. लोग मेरी कमर, बूब्स, गांड, चेहरा, होंठ और यहां तक कि मेरे पिछवाड़े पर भी कमेंट करते हैं.

ऐसे कमेंट्स मैंने कई बार सुने हैं.

लेकिन मैंने कभी किसी को जवाब नहीं दिया … क्योंकि बात बढ़ाने से कोई फायदा नहीं.


एक दिन शाम को मेरे पति का फोन आया कि उनका छोटा-सा एक्सीडेंट हो गया है.

मैं तुरंत निकली और हॉस्पिटल पहुंची जहां देखा कि उन्हें हल्की-सी चोट आई थी.


पता चला कि एक फोर-व्हीलर ने उनकी गाड़ी को पीछे से ठोक दिया था.


जब मैं अपने पति के पास पहुंची, तो एक सब-इंस्पेक्टर गुरमीत खान उनसे बयान ले रहा था.

कुछ देर बाद गुरमीत जी ने मेरा परिचय भी लिया.


फिर पति को डिस्चार्ज करने के बाद उसने मुझे घर तक ड्रॉप किया और चला गया.

उस दिन मैंने गुरमीत खान पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया.


फिर 4 दिन बाद शाम के वक्त करीब 7 बजे मैं किचन में खाना बना रही थी. मैंने उस वक्त बंधेज की नीली साड़ी और मैचिंग ब्लाउज़ पहना था और बालों का जूड़ा बना रखा था.

मैंने सामान्य कपड़े ही पहने थे.


तभी डोरबेल बजी.

मैंने जाकर दरवाजा खोला, तो सामने गुरमीत खान खड़ा था.


मैंने उसे अन्दर बुलाया और वह मेरे पति के साथ बैठकर बातचीत करने लगा.


फिर मैं चाय और कुछ नाश्ता लेकर आई.

मैंने गौर किया कि गुरमीत का ध्यान मुझ पर कुछ ज्यादा ही था.


वह मुझे बार-बार देख रहा था.

उसकी इस तरह की नजरों से मुझे काफी गुस्सा आ रहा था क्योंकि आज तक कोई मुझे ऐसे देखता तो मुझे चिढ़ हो जाती थी.


हालांकि मैंने अपनी साड़ी को ठीक किया.

मेरे पति ने गुरमीत से खाना खाने के लिए भी कहा.


लेकिन गुरमीत ने कहा- आज नहीं, मैं कभी फ्री होकर आता हूँ. फिर हम लोग साथ बैठकर खाना खा लेंगे.


फिर वह चल गया लेकिन जाते-जाते उसने दरवाजे पर मुड़कर मुझे दो बार देखा.


मैंने अपनी ओर से कोई प्रतिक्रिया या सिग्नल नहीं दिया जिससे उसे कोई बढ़ावा मिले.


लेकिन आज जब मैंने उसे गौर से देखा तो वह मुझे बहुत हैंडसम लगा.

उसकी हाइट 5 फीट 8 इंच, कसरती शरीर और उम्र करीब 30-32 साल होगी.


मेरे पति से बातचीत में उसने बताया कि उसकी अभी तक शादी नहीं हुई थी.

उस रात सोते वक्त मेरे दिमाग में बस गुरमीत का चेहरा ही घूम रहा था.

उसके बारे में सोचते सोचते कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला.


फिर एक दिन सुबह 11 बजे मैं मार्केट में कुछ सामान लेने गई.


उस समय मैंने काला घेर वाला कुर्ता पहना था.


रास्ते में मुझे गुरमीत खान दिखा.

वह मुझे देखते ही मेरे पास आ गया और मेरे पति के बारे में पूछने लगा.


मुझे उसके साथ बात करने में काफी संकोच हो रहा था.

लेकिन चूंकि हम बीच रास्ते में थे तो मैंने सहज तरीके से सिर्फ हां और ना में जवाब दिए.


वह बार-बार मुझे हवस भरी नजरों से देख रहा था लेकिन उसने कोई ऐसी हरकत या बात नहीं की, जिससे मुझे परेशानी हो.


आखिर में जब मैं जाने लगी तो उसने कहा- प्रिया भाभी जी, आपने चाय बहुत अच्छी बनाई थी!

मैंने मुस्कुराते हुए ‘थैंक्स.’ कहा और वहां से निकल गई.


रास्ते में भी मैं उसी के बारे में सोचती रही.


दो दिन बाद शाम 5 बजे मेरे पति ने गुरमीत को फोन लगाया और रात के खाने पर इनवाइट किया.

गुरमीत ने भी रात 8 बजे आने का बोल दिया.


अब मेरे दिमाग में ये जानने की उत्सुकता जाग उठी कि गुरमीत खान मेरे बारे में क्या सोचता है.


यही सोचते हुए मैंने फैसला किया कि आज मैं अच्छे से सज-संवर कर उसके सामने जाऊंगी, ताकि उसके दिमाग को पढ़ सकूँ.

लेकिन मैंने यह भी तय कर लिया था कि उसके साथ मुझे कुछ भी गलत नहीं करना है.


शाम होते-होते मैंने सारा काम खत्म कर लिया और खाना भी पका लिया.


फिर मैं तैयार होने लगी.

मैंने लाल शिफॉन साड़ी और उसी के साथ लाल रंग का मैचिंग ब्लाउज़ पहना.


ब्लाउज़ सामने से डीप नेक और पीछे से बैकलेस था.

सामने से मेरे आधे से ज्यादा क्लीवेज दिख रहे थे.

यहां तक कि मेरे बूब्स पर जो तिल था, वह भी साफ दिख रहा था.


मैंने बालों का जूड़ा बनाया, हाथों में लाल चूड़ियां पहनीं और कानों में लटकन डाले. अब मैं पूरी तरह तैयार थी.


करीब 8 बजे डोरबेल बजी.

मैंने जाकर दरवाजा खोला तो सामने गुरमीत खड़ा था.


मैंने उससे नमस्ते की.

लेकिन वह एकटक मुझे देख रहा था.

मैं भी सामने खड़ी होकर उसकी नजरों को भाँपने में लगी थी.


कुछ समय बाद मैंने उससे कहा- कहां खो गए आप!

उसके हाथों में फूलों का गुलदस्ता था, जो उसने मुझे थमाया.


जैसे ही मैंने गुलदस्ता लिया, गुरमीत के और मेरे हाथ आपस में छू गए.

उसी पल गुरमीत बोला- ये गुलदस्ता आपके लिए!

वह मुस्कुरा दिया.


मैंने सामान्य ढंग से गुलदस्ता लिया और उसे अन्दर हॉल में ले आई.


फिर वह मेरे पति के साथ बैठकर बातें करने लगा.

पति ने उसे ड्रिंक ऑफर की लेकिन उसने मना कर दिया.


मेरा किचन का काम भी पूरा हो चुका था, तो मैं भी उनके साथ बैठकर बातें करने लगी.


कुछ देर बाद मैंने नोटिस किया कि गुरमीत की नज़रें मुझ पर ज़्यादा ही रुक रही थीं, खास तौर पर मेरे क्लीवेज पर, जो उसे साफ दिख रहे थे क्योंकि वह मेरे ठीक सामने बैठा था.


शायद मैं उसकी नज़रों को समझ चुकी थी लेकिन कई बार आंखें मिलने पर भी मैंने कोई जवाब नहीं दिया.


आखिरकार मेरे पति बोले- प्रिया खाना तो लगाओ!

मैं उठी और गर्म खाना डाइनिंग टेबल पर ले आई.


फिर मैं, मेरे पति और गुरमीत तीनों डाइनिंग टेबल पर आ गए.


बैठने का इंतज़ाम कुछ ऐसा हुआ कि मैं पति और गुरमीत के बीच की कुर्सी पर बैठी.


हमने खाना शुरू किया.

खाना खाते वक्त मेरे पति और गुरमीत बातें कर रहे थे.


अचानक गुरमीत ने नीचे से मेरे पैरों पर अपने पैर रखकर उन्हें सहलाने की कोशिश की.


मैं सहम गई और अपने पैर पीछे खींच लिए, फिर उसकी नज़रों से नज़रें चुराकर देखा.


लेकिन कुछ देर बाद गुरमीत ने फिर वही हरकत की.

इस बार मैंने पैर पीछे नहीं किए, बल्कि गुस्से से उसकी ओर देखने लगी.

पर उस पर कोई असर नहीं हुआ.


वह नीचे अपने पैरों से मेरे पैरों को सहलाता और मसलता रहा.


खाना लेते वक्त भी उसके और मेरे हाथ कई बार छू गए लेकिन मैंने ऐसा जताया जैसे कुछ हुआ ही नहीं.


एक बार तो उसने मेरा हाथ अपनी कमर पर रखकर सहला दिया.

उस पल मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.


फिर हमारा खाना खत्म हुआ.


जब मेरे पति बाथरूम गए, मैंने गुरमीत से कहा- ये क्या कर रहे थे आप. अगर मेरे पति देख लेते तो?

वह मुस्कुराया और बोला- आपको परेशान कर रहा था प्रिया. इसमें तो बड़ा मज़ा आ रहा था!


फिर वह हाथ धोकर आया.


गुरमीत जाने लगा.


मैं अभी भी गुस्से में थी लेकिन उसे छोड़ने बाहर तक गई.


जाते-जाते गुरमीत ने कहा- काफी अच्छा डिनर था. आपके हाथों में जादू है. काश, मुझे हमेशा ऐसा खाना मिले!


उसने मेरा एक हाथ अपने हाथ में लिया, ‘थैंक्स’ कहा और मेरे हाथ को चूमकर चला गया.


उसके जाने के बाद मैं रात भर उसके बारे में ही सोचती रही.

मैं सोच रही थी कि मैंने उसे बढ़ावा क्यों दिया.


अगले दो-तीन दिनों में गुरमीत मुझसे रास्ते में दो-तीन बार टकराया लेकिन हमारी कोई बातचीत नहीं हुई.


हां, बस हमारी आंखें चार हुईं.

हालांकि, मन ही मन मुझे गुरमीत अच्छा लगने लगा था.


एक दिन शाम को मेरे पति बोले- मुझे अर्जेंट काम से दो दिनों के लिए शहर से बाहर जाना है. चलो, स्टेशन जाते वक्त रास्ते में डिनर कर लेंगे. वहां से मैं स्टेशन चला जाऊंगा और तुम घर लौट आना.

मैंने ‘ठीक है’ कहा और तैयार होने लगी.


मैंने हल्के हरे रंग की कॉटन साड़ी और काला कॉटन ब्लाउज़ पहना, बालों का जूड़ा बनाया और तैयार होकर बाहर आई.


मेरे पति भी तैयार थे.

हम सात बजे के करीब स्टेशन के लिए निकल पड़े.


रास्ते में हम एक रेस्तरां में रुके, जो फैमिली बार और रेस्तरां था.

वहां टेबल पर बैठकर हमने खाना ऑर्डर किया.


खाना आने में काफी देर हुई जिस दौरान हमने खूब बातें कीं.


करीब आठ बजे खाना आया.

मेरे पति पहले से ही देर से चल रहे थे, तो उन्होंने जल्दी-जल्दी खाना शुरू किया.


खाते वक्त मेरी नज़र दूर एक टेबल पर गई जहां गुरमीत पहले से बैठा हुआ था और शायद वह ड्रिंक कर रहा था.


खाना खत्म करने के बाद मेरे पति बोले- प्रिया, अब मैं निकलता हूँ. तुम घर चली जाना. मेरी ट्रेन का समय हो रहा है.

वे चले गए.


उनके जाने के बाद मैं सोचने लगी कि कहीं गुरमीत ने हमें देख तो नहीं लिया.

इसलिए मैं भी जल्दी-जल्दी खाना खाने लगी.


पांच मिनट बाद गुरमीत अपनी टेबल से उठकर मेरी टेबल पर आ गया और मेरा हाल-चाल पूछने लगा.

उसके मुँह से ड्रिंक की स्मेल साफ आ रही थी.


मैं उससे बात करते वक्त अपनी नज़रें चुरा रही थी.


दो-चार मिनट बात करने के बाद गुरमीत अचानक बोला- प्रिया भाभी, आप वाकयी बहुत खूबसूरत और हॉट हैं.

मैंने कहा- देखिए गुरमीत जी, अगर कोई परिचित मुझे आपके साथ इस तरह देख लेगा … तो मुझे बड़ी परेशानी हो जाएगी.


वह बोला- तो ठीक है. मुझे आपसे ढेर सारी बातें करनी हैं. बताइए, हम कहां बैठकर बात कर सकते हैं?

मैंने कहा- हम अकेले नहीं मिल सकते, ये समझिए!


वह बोला- पहले दिन से जब से मैंने आपको देखा, तभी से मैं आपसे ढेर सारी बातें करना चाहता था, लेकिन ऐसा मौका नहीं मिला. एक काम करते हैं, मैं आपको घर छोड़ देता हूँ और उसी बहाने कुछ देर बातें भी कर लेंगे.

मैंने कहा- आप नहीं समझे? घर पर अगर किसी ने हमें देख लिया, तो मेरी बदनामी हो जाएगी!


गुरमीत ने मुझे बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन मैं मना करती रही.


हालांकि मेरे दिल-दिमाग में भी उससे मिलकर बात करने का मन था लेकिन समाज की मर्यादाओं को मैं इस तरह नहीं तोड़ सकती थी.


आखिरकार गुरमीत ने कहा- चलिए मैं आपको घर तक तो छोड़ सकता हूँ!

मुझे राज़ी होना पड़ा.


मेरा दिल भी गुरमीत के साथ कुछ समय बिताने को बेताब था.

लेकिन उसने पी रखी थी इसलिए मैं उससे दूर भागने की कोशिश कर रही थी.


फिर हम दोनों बाहर निकले और गुरमीत ने अपनी टू-व्हीलर स्टार्ट की.


मैंने गुरमीत से कहा- एक काम करो. आपने शराब पी रखी है और शायद आप गाड़ी भी अच्छे से न चला पाओ. इसलिए आप मेरी चिंता मत करो. मैं ऑटो लेकर घर चली जाऊंगी.


इस पर गुरमीत बोला- मैडम, आप चिंता न करें. हमारे लिए तो ये रोज का काम है. आप निश्चिंत होकर बैठ सकती हैं. अभी तो बोतल आधी ही भरी है.

उसने अपनी जेब से दो और बोतलें निकाल कर मुझे दिखाईं.


मैंने उससे कहा- अभी और पियोगे?

उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- हां. अभी तो रात शुरू हुई है.


आखिरकार मैं उसकी बाइक पर पीछे बैठ गई और उसने गाड़ी चालू की. वह मुझे लेकर मेरे घर की ओर चल पड़ा.


मैंने उससे कहा- आप मुझे घर से थोड़ा पहले ही उतार देना. वहां से मैं पैदल चली जाऊंगी.

पहले तो उसने कहा- नहीं, मैं आपको घर तक छोड़ दूँगा.


लेकिन मेरे बार-बार कहने पर वह मान गया.

फिर मैंने उससे आप की जगह तुम कहना शुरू किया और पूछा- तुमने तो मेरे पति से कहा था कि तुम शराब नहीं पीते?


गुरमीत हंसते हुए बोला- अरे अपने सारे राज थोड़ी न आपके पति के सामने खोलकर रख दूँगा.

गाड़ी चलाते-चलाते गुरमीत बार-बार मेरी तारीफ कर रहा था.


मैंने उससे दो बार कहा- गुरमीत शायद तुम आज शराब के नशे में बोल रहे हो.

उसने जवाब दिया- मैडम, नशा भी इतना नहीं चढ़ा … और वैसे भी, बोतल में वह नशा नहीं जो आप में है!


मैं उसकी बातों को समझ रही थी.


कुछ देर बाद हम घर के करीब पहुंच गए.

मैंने उसे एक सुनसान जगह पर गाड़ी रोकने को कहा और गुरमीत ने वहां गाड़ी रोक दी.


मैं जैसे ही उतरी, गुरमीत ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

मैंने उसकी इस हरकत का विरोध करते हुए कहा- गुरमीत जी, मुझे यहां छोड़ दीजिए. कहीं किसी ने देख लिया तो मैं बदनाम हो जाऊंगी!


उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि मैं अपना हाथ छुड़ा नहीं पा रही थी.

उसने मुझे अपनी ओर खींचा और मेरा चेहरा उसके चेहरे के सामने आ गया.


इससे पहले कि वह कुछ और करता, मैंने जैसे-तैसे अपने हाथ छुड़ाए और जल्दी-जल्दी घर की ओर चल पड़ी.


कुछ ही देर में मेरा घर आ गया.

मैंने जल्दी से दरवाजा अन्दर से बंद किया और राहत की सांस ली.


उसके हाथ का स्पर्श न जाने क्यों मुझे गर्म करने लगा था.

आज रात में मेरे पति राज भी घर पर नहीं थे तो मैं बेईमान होने लगी थी.


अपनी इस सेक्स स्टोरीज इन हिंदी के अगले भाग में मैं आपको बताऊंगी कि गुरमीत ने मेरे साथ किस तरह से सेक्स किया.

आपके कमेंट्स मुझे हौसला देंगे.


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