Palang Tod

मेरी भाभी की विधवा बहन की है. उससे मेरी दोस्ती हो गयी और मैंने उसे सेक्स के लिए सेट कर लिया. एक बार वो घर में अकेली थी.


दोस्तो, मेरा नाम राजकुमार है। मेरी उमर 24 साल है। मैं प्रयागराज उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं।

मेरी हाईट 6 फीट है। इसी तरह मेरे लन्ड की लंबाई 7.5 इंच और मोटाई 2.5 इंच है।


अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है जो एकदम सच्ची घटना है।

यह घटना पिछले साल दिसंबर में हुई थी।


यह हॉट इंडियन भाभी पोर्न कहानी मेरी भाभी की बड़ी बहन रजनी की है जिनके पति का देहावसान कैंसर की वजह से 2019 में हो गया था।

इनकी उम्र 36 साल है।

फिगर ऐसा कि किसी का भी मन डोल जाए।


इनके 2 बच्चे हैं।

रजनी अपने पति की डेथ के बाद वो मायके में बच्चों के साथ रहने लगी है।

उसके अलावा केवल उसकी मां उसके साथ रहती है।


भाभी की शादी के बाद उससे हम लोगों की बात कभी कभी हो जाती थी।

उसके पति की मृत्यु के बाद उसका एक बेटा हमारे घर रहकर पढ़ाई करने लगा है। तब से हम लोगों की बातें कुछ ज्यादा होने लगी हैं।


एक दिन शाम को रजनी का फोन आया और बेटे की पढ़ाई के बारे में पूछने लगी।

फिर वो बोली- दिन भर घर पर बैठ कर बोर होती रहती हूं तो फोन लगाकर लोगों से बात कर लेती हूं।

तो मैंने उससे कहा- अगर ऐसी बात है तो आप मुझे रोज आधे घंटे के लिए फोन कर सकती हैं।


उसके बाद मैं और रजनी रोज बातें करने लगे।

शुरु में तो मैं बातें पढ़ाई की और वो अपनी बीते दिनों के बारे में बात करती थी।

फिर धीरे धीरे बातें मेरी गर्लफ्रेंड पर आ गई।


मैंने रजनी पर लाइन मारते हुए कहा- जब आपके जैसी भाभी हो तो गर्लफ्रेंड की क्या जरूरत है।

रजनी हंसकर बात को टाल गई।


उसके बाद से मैं रजनी को हंसी मजाक में अपनी गर्लफ्रेंड बोलने लगा और वो बुरा भी नहीं मानती थी।

बस यही कहती कि कोई अपनी उम्र की पटाओ।


धीरे धीरे हम डबल मीनिंग चुटकुले और जोक्स शेयर करने लगे और बातें करने लगे।


फिर धीरे धीरे हम सेक्स की बातें करने लगे।


तब रजनी ने बताया कि उसने पहला सेक्स अपने पति के साथ ही शादी के बाद किया था।


इन बातों को सुनकर अब मैं मन में जल्द से जल्द रजनी को अपने लन्ड के नीचे लाने के लिए जुगाड़ सोचने लगा।

एक दिन मैंने मजाक में फोन पे उससे कहा कि मुझे उसको चोदना है।


इस बात को सुनकर वो गुस्सा हो गई और बात करना बंद कर दी।


करीब एक हफ्ते बाद उसका फोन आया और बात हुई।

रजनी ने कहा कि मैं ऐसी बात दोबारा न करूं।


मैंने कहा- बचाकर क्या करोगी?

रजनी ने कहा- मैंने अपने पति के अलावा कभी किसी के बारे में नहीं सोचा!

तो मैंने कहा- अब सोचो।


वो कुछ नहीं बोली और बाद में धीरे धीरे फिर से सेक्स की बातें शुरू हुई।


कुछ ही दिनों में हम दोनों फोन पर ढेर सारी सेक्स की बातें करते और रजनी अपने एक्सपीरियंस बताती।


फिर हम दोनों अब फोन पर सेक्स करने लगे थे, कभी वीडियो काल पर तो कभी फोन पर!

वीडियो कॉल रजनी पूरी तरह नंगी होकर करने लगी थी।


रजनी के भरे हुए बदन और बूब्स को देखकर अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

मैं जल्द जल्द रजनी को अपने लन्ड के नीचे लाना चाह रहा था।


रजनी का शरीर एकदम कसा हुआ है जैसे कि बड़े नाजों से बनाया गया हो।

पर अब भी हम लोग सिर्फ फोन सेक्स से ही गुजारा कर रहे थे क्योंकि भाभी के घर जाने का कोई चांस नहीं मिल रहा था।


एक महीने बाद भाभी की मां 4 दिन के लिए अपने मायके जाने वाली थी।

रजनी ने फोन करके मुझे पहले ही बता दिया था।


और फिर रजनी का फोन भाभी के पास आया कि अगले 4 दिन वो घर पर अकेले रहने वाली है। इसीलिए भाभी मुझको घर पर भेज दे।

अगले दिन सुबह भाभी ने हमको अपने घर जाने को बोला।


मैं बहुत खुशी से जाने लिए तैयार था।


शाम को मैं 3 बजे घर से निकला।

रास्ते में जाते वक्त मैंने मेडिकल शॉप से कंडोम और सेक्स की की गोली ली।


5 बजे मैं रजनी के घर पहुंच गया।

तब तक उसकी मां जा चुकी थी।


शाम को सबसे पहले पहुंच कर मैंने फ्रिज में बर्फ जमने के लिए रख दिया और फिर बात करने बैठ गए।

उसका छोटा बेटा मेरी मोबाइल में गेम खेलने लगा।


रात को रजनी ने खाना बनाया और तकरीबन रात 9 बजे हम तीनों ने खाना खाया और साथ में मैंने सेक्स की एक गोली खा ली।

फिर हम सोने के लिए एक ही कमरे अलग अलग तख्त पर लेट गए।


करीब आधे घंटे बाद उसका बेटा सो गया।


फिर रजनी धीरे से मेरे तख्त पर रजाई के अंदर आ गई और फिर हम दोनों एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे।

कभी रजनी मेरे गालों को चूमती तो कभी मैं रजनी के गालों को चूमता और चूचियां दबा देता.

वो हल्की सी … सी … की आवाज निकलती।


इस तरह हम दोनों एक दूसरे के जिस्मों से खेलते खेलते कब आधे नंगे हो गए पता नहीं चला।

मैं सिर्फ अंडरवीयर और बनियान में और रजनी केवल ब्रा और पैंटी में थी।


फिर हम दोनों एक दूसरे को कस कर गले लगाया और किस करने लगे।

रजनी किस करने में एकदम माहिर थी. एक पल ऐसा लगा की जैसे वो मेरे होंठों को काट खायेगी।


इधर मुझ पर भी अब दवाई का असर होने लगा था।

वो मेरे अंडरवीयर में बने तंबू से महसूस हो रहा था।


मैं अब रजनी को जानवरों की तरह किस करने लगा था, कभी उसके गले पर तो कभी कानो और होठों पर मैं काट रहा था।

और रजनी के मुंह से सिर्फ आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … की कामुक आवाज़ें आ रही थी।


मैं गले से चूमते हुए चूचियों तक पहुंचा जो अब तक ब्रा में कैद थी।

एक ही झटके से मैंने ब्रा को खींचा और पीछे से उसकी स्ट्रिप टूट कर रजनी की चूचियों पर लगी जिससे उसकी चीख … अरे मम्मी रे … निकल गई।

मैंने उसके गालों पर किस किया और चूचियों को दबाने लगा। उसके मुंह से आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … के आवाज़ें निकल रही थी।


अब मैंने उसकी दोनों चूचियों को हाथो से मसला और उसके मुंह से आह … सी … निकली।


फिर मैं रजनी की एक चूची को मुंह में लेकर तेजी तेजी चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को तेज तेज पूरे बल से दबा रहा था।

जिससे उसके मुंह से केवल आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … अरे मम्मी रे … आह … आह … आह … ईई … धीरे करो! की कामुक आवाज़ें आ रही थी।


ये आवाजें पूरे कमरे के माहौल को और भी रोमांटिक बना रही थी जिससे मुझ पर और भी नशा छा रहा था और मैं और भी तेजी से करने लगता था।

उसके मुंह से केवल कराहने … और हल्की सिसकारियों … की आवाज आ रही थी।


अब धीरे धीरे मेरा एक एक हाथ उसकी पैंटी पर गया जो काले रंग की थी।

मैंने पैंटी के ऊपर से ही चूत को मसल दिया जिससे उसने चीख कर गर्दन उठा ली।


फिर मैं उठा और फ्रिज से जमाई बर्फ उठा लाया जो छोटे छोटे क्यूबिक आकार में थी।

बर्फ साइड में रख कर मैंने अपने एक हाथ से पैंटी उतार दी और चूत को सहलाने लगा।


वो कमर उठा उठा कर साथ दे रही थी।

उसकी चूत बहुत गर्म हो गई थी।


तभी मैंने साइड में रखे एक बर्फ के टुकड़े को उसकी चूत में डाल दिया।


जिससे रजनी अपने हाथ पैरों को पटकने लगी।

लेकिन मैंने उस टुकड़े को बाहर नहीं निकलने दिया.

अब वह बिन पानी मछली की तरह तड़प छटपटा रही थी।

लेकिन मैंने उसे नहीं छोड़ा।


फिर मैंने थोड़ा नीचे आकर उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए जिससे वो चिंहुक उठी।


अब मैं अपने होंठों से उसकी चूत में घुसे उस बर्फ के टुकड़े इधर उधर करने लगा।

जब टुकड़ा पिघलता तो उसको मैं पी जाता।


इस बीच रजनी के मुंह से सिर सीत्कार निकल रही थीं आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … ऊ … या … चूस लो … खा जाओ … ये निगोड़ी चूत बहुत परेशान करती है … इसका भरता बना दो … आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … ऊ … या … के आवाज निकल रही थी।


यह खेल तकरीबन 20 मिनट तक चला।

इस बीच वह एक बार झड़ चुकी थी।


इसके बाद में एक साइड में लेट गया गया और किस करने लगा।

थोड़ी देर में मैंने उसे लन्ड चूसने को कहा मगर वो मना करने लगी।

मैंने ज्यादा जोर नहीं दिया।


फिर रजनी उठी और लन्ड को हाथ में हिलाने लगी, लन्ड के टोपे को आगे पीछे करने लगी।


उसने पास रखे कंडोम को उठाया और लन्ड पर लगाकर लेट गई और मुझे ऊपर आने का इशारा किया।

मैं उसके ऊपर लेट कर उसको किस करने लगा।


फिर मैं लन्ड को चूत पर घिसने लगा जिससे वह और उत्तेजित होने लगी और गांड उठा कर चूत में लन्ड लेने की कोसिस करने लगी.

उसके मुंह से आह … आह … ईई … आह … सी … आह … सी … ऊ … या … की आवाज आ रही थी।


फिर मैंने अपने लन्ड को चूत के मुंह पर एक झटका मारा लेकिन लन्ड चूत के बाहर छटक गया और रजनी हंसने लगी।

वो बोली- तुमसे ना होगा।

इस पर मैं हंस पड़ा और बोला- रुको अभी तुम्हारी चूत फाड़ता हूं।


वो बोली- मेरी चूत फाड़ के दिखाओ तो मैं तुम्हारी भाभी की चूत भी तुमसे फड़वा दूंगी।


मैंने तब उससे शर्त लगाई कि उसको भाभी की चूत दिलानी पड़ेगी।

वो मान गई।


इस बार मैंने लन्ड को चूत के मुंह पर सेट किया और एक जोर का झटका लगाया।

लन्ड आधा उसकी चूत में जाकर फंस गया।

उसको बहुत दर्द हुआ।


रजनी जोर से चीखने लगी, बोली- लन्ड बाहर निकालो, बहुत जलन हो रही है.

वो इधर उधर सर पटक रही थी … मुझको पीछे करने की नाकाम कोशिश कर रही थी और जोर जोर से चीख रही थी.

लेकिन मैंने एक हाथ से मुंह पकड़ रखा था।


मैं थोडा रुका तो रजनी ने चीखना कम किया।

मैंने लन्ड को थोड़ा बाहर निकाला और एक जोरदार झटका लगाया।

लन्ड चूत तो फाड़ता हुआ 7.5 इंच अंदर बच्चेदानी जा टकराया।


इस पर रजनी बहुत जोर से चीख पड़ी और मुझसे चिपक गई.

उसने मेरे गले पर काट लिया … और अपने नाखून मेरे पीठ में गड़ा दिये और रोने लगी।


वह बोली- प्लीज … निकालो बाहर एक बार … बहुत लम्बा और मोटा है तुम्हारा … बहुत दर्द कर रहा है।

मगर मैं रुका नहीं … मैं उसको बिना रुके चोदने लगा.

और वो सिर्फ ‘आह आह आह …’ करे जा रही थी.


थोड़ी देर बाद जब नॉर्मल हुई तो गांड उठा कर लन्ड के ताल से ताल मिला रही थी और पूरे कमरे से फच्च … फ्चा … फच्च … की आवाज़ आ रही थी।

वो मजे से सीत्कारें भरने लगीं- आह … पूरा पेलो आह मजा आ रहा है … और चोदो अन्दर तक लंड पेल … मेरी बच्चेदानी में छेद कर दे … आह फाड़ दे मेरी चुत को … आज से ये तेरी गुलाम है जान.


मैं भी जोश में आ गया- आह ये लो … और अन्दर लो … आज के बाद तुम मेरी बीवी हो … आह अह!

रजनी- आह जान, ऐसे ही पेलो, मेरा जीवन धन्य हो गया … आज पहली बार इतनी देर तक चुदी हूँ … आह फाड़ डालो आज मेरी चूत को.


पन्द्रह मिनट में ही रजनी दो बार झड़ चुकी थीं और मेरा अभी हुआ नहीं था.


लगभग 20 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद मैं झड़ गया और रजनी के ऊपर लेट गया।

थोड़ी देर बाद रजनी उठी, उसने कंडोम निकाल दिया और लन्ड को मुंह में लेकर चूसने लगी।


मैं यह सोच रहा था कि जो अभी तक चूसने के लिए तैयार नहीं थी वो अचानक रण्डी की तरह मेरा लंड चूस रही थी।

और मैं एकदम मस्त था।


थोड़ी देर मेरा लन्ड फिर से खड़ा हो गया और वो लन्ड के ऊपर बैठ कर चुदाने लगी।

मैं दोनों चूचियों को हाथ में लेकर दबा रहा था।


तभी रजनी तेज तेज लन्ड पर कूदने लगी और जानवरों की तरह मुझे जहाँ तहां दांतों से काटती हुई झड़ कर ऊपर लेट गई।

उस वक्त मुझे उससे डर लगने लगा था।


उस रात और अगले तीन दिन हमने और रजनी ने खूब सेक्स किया।

तीन दिन के बाद रजनी के चेहरे पर एक अलग ही निखार था।


रात भर चुदाई के बाद मैं उसके पास रुक गया और 4 दिन तक उसकी खूब चुदाई की.

इसके बाद मैं घर आ गया और पहले की तरह उससे बातें होने लगीं.


उसके पास जाने का मौका नहीं मिल रहा था तो हम दोनों फोन पर ही सेक्स करने लगे.


फिर लगभग 3 महीने बाद रजनी के छोटे भाई की शादी तय हुई जो कि बीते साल के आखिर में होनी थी.


मेरी भाभी शादी की तैयारी के लिए एक महीना पहले ही मायके चली गईं.


उनका भाई बंगलौर की प्राइवेट कम्पनी में काम करता है जिसकी वजह से उसको शादी से केवल 5 दिन पहले से छुट्टी मिली.


जैसा कि आप लोग जानते हैं कि शादी के घर में सैकड़ों काम होते हैं.


इसी के चलते उन सब कामों को करने के लिए भाभी की दीदी ने शादी के 15 दिन पहले मुझे बुला लिया.

मैं खुशी खुशी चला भी गया.


पहले दिन मेरा बिस्तर भाभी की माँ के कमरे में लगा दिया.

रात जैसे तैसे गुजरी.


सुबह मैंने रजनी को बुलाया और उससे बात की कि ऐसे काम नहीं चलेगा.

यह सुनकर रजनी बोली- रुको, कुछ इंतजाम करते हैं.


अगली रात दो तख्त एक साथ लगाकर चार लोगों के लेटने की व्यवस्था हुई.

उधर मैं, भाभी, रजनी और मेरा भतीजा सो गया.


मैं बता दूं कि मेरी भाभी की उम्र 28 साल है और उनका दो साल का एक लड़का है.

भाभी का शरीर एकदम मस्त भरा हुआ है और उनके मम्मों से अभी भी दूध आता है.


मैं तकरीबन 9 बजे खाना खाकर लेट गया.


चूंकि गांव में शादी के समय रात में गाना बजाना होता है.

इसी वजह से रजनी और भाभी देर रात को कमरे में आईं.


रजनी मेरे बगल लेट गयी और उनके बाद भाभी.

जैसा कि मुझे पहले से पता था कि आज साथ लेटने वाले थे तो मैंने पहले से सारी व्यवस्था कर रखी थी.


रजनी लेटने के बाद अपना कंबल छोड़ कर मेरे कंबल में आ गयी और उसने धीरे से मुझे जगाया.


मैं जाग गया और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे.

रजनी की ‘उम्ह … उम्ह … आह …’ की आवाज़ आने लगी.


चूंकि बगल में भाभी लेटी थीं तो ज्यादा तेज आवाज़ नहीं कर सकते थे.


फिर मैंने धीरे से रजनी के चूचे दबाने शुरू कर दिए, जिससे उसके मुँह से कामुक आवाजें निकलना तेज हो गईं.

मैंने फिर रजनी के कुर्ते को ऊपर कर दिया और उसकी ब्रा को सरका कर उसका एक दूध अपने मुँह में भर कर चूसने लगा.


रजनी मीठी मीठी सिसकारियां लेने लगी- उम्ह … आह … सी … उम्ह … काटो नहीं यार … आह कितना मजा आ रहा है आह सी!


मैं पूरे जोश में बारी बारी से रजनी के दोनों चूचे पी रहा था.

पीते पीते मैंने अचानक से रजनी के दूध पर तेजी से काट लिया तो वह चीख़ पड़ी- ऊई मम्ममी..!

मैं सकपका गया.


थोड़ी देर में वह संयत हो गई और मैंने वापस धीरे धीरे चूसना चालू कर दिया.

उसकी मादक कराहें ‘आह आह सी..’ की निकलने लगीं.


फिर मैं उठा और अपने बैग को खोल कर उसमें से कंडोम ढूंढने लगा.

यह बैग मैं पहले से से उस कमरे से इस कमरे में ले आया था.


मैंने बैग में से कंडोम निकाला और वापस कंबल में आ गया.

फिर धीरे से नीचे को आकर रजनी की टांगों से उसकी सलवार और पैंटी को नीचे करके चूत को चूसने लगा.


इस बार रजनी काफी दिन बाद चुद रही थी तो उसकी सिसकारियां कुछ ज्यादा तेज स्वर में निकलने लगी थीं.

‘उम्ह … आह … सी …’


मैं मस्ती से चुत चूसने में अभी लगा हुआ ही था कि रजनी उठी और वह मुझे लिटा कर खुद मेरे ऊपर चढ़ गयी.

उसने मेरा लोवर और अंडरवीयर नीचे कर दिया और मेरा आधा सख्त हुआ लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.


आह मजा आ गया.


सच में रजनी को लौड़ा चूसने का बड़ा बढ़िया अनुभव है.

वह लंड को अपने कंठ के अंतिम छोर तक ले जा रही थी और मेरी गोटियों को भी हाथ सहला कर लौड़े में मस्ती भर रही थी.


उस वक़्त मैं कैसा महसूस कर रहा था, शब्दों में नहीं बता सकता.

बस मेरे मुँह से ‘उम्ह … उम्ह … आह … सक इट बेबी’ जैसी आवाज़ें निकल रही थीं.


फिर रजनी ने मेरे हाथ से कंडोम लिया और लंड पर लगाकर वह लौड़े को अपनी चुत में घुसेड़ने लगी.

जैसे ही छेद और सुपारे का मिलन हुआ, वह धच से लंड पर बैठ कर घुड़सवारी करने लगी.


उसके मुँह से ‘उम्ह … उम्ह … आह … सी सी …’ की आवाज़ें निकल रही थीं.

लगभग दस मिनट बाद रजनी बहुत तेजी से लंड पर अन्दर बाहर करने लगी और उसके मुँह से तेज तेज आवाज़ें निकलने लगीं.


तभी बगल में कुछ हलचल हुई, जिससे मुझे लगा कि शायद भाभी जाग गयी हैं.

मैंने रजनी को इशारा किया.


रजनी बिना आवाज़ किए मेरे ऊपर लेट गयी और धीरे से मेरे लौड़े से उतर कर साइड में होकर कपड़े पहनने लगी.

उधर से भाभी ने हाथ रजनी की तरफ बढ़ाया लेकिन उन्होंने जब अपने बाजू में रजनी को नहीं पाया तो वे उठकर बैठ गईं.


उन्होंने कमरे की लाइट ऑन कर दी और हम दोनों को देख लिया.

पहले तो भाभी ने गुस्सा किया और हम दोनों को डांटा.


फिर बोलीं- अब सुबह बात होगी. चुपचाप सो जाओ!

इसके बाद सब सो गए.


सुबह जब मैं उठा, तो सब लोग घर में काम में लगे थे.

मैंने भाभी की माँ से काम पूछा और बाइक लेकर निकल गया क्योंकि भाभी से डर लग रहा था.


मैं दोपहर तक घर नहीं आया, इस बीच भाभी ने 2-3 बार काल किया, पर मैंने नहीं उठाया.

लगभग एक बजे तक मैंने सारे काम निपटाए और बाहर एक दुकान पर बैठ कर चाय पीने लगा था.


तभी रजनी का फोन आया, मैंने तुरंत उठाया और बात हुई.

वह बोली- डरो मत तुम्हारी भाभी से मैंने बात कर ली, घर आ जाओ … रात के लिए व्यवस्था करके आना.


मैं बहुत खुश हुआ कि आज भाभी की चूत चोदने को मिलेगी.


मैं पहले मेडिकल स्टोर गया, उधर से रिब्ड कंडोम लिया और सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवा ली.


उसके बाद बेकरी गया और 500 मिलीग्राम की लिक्विड चॉकलेट का पैक ले लिया और उसके अलावा कई सारी चॉकलेट लेकर घर आ गया.


घर पहुंचा तो सामने भाभी ही मिल गईं.

मैं उनसे बिना कुछ बोले सीधा अन्दर चला गया और चॉकलेट का पैकेट ले जाकर फ्रिज में रख दिया.


थोड़ी देर में भाभी आईं और मुझे खाना देकर चली गईं.


मैं खाना खाकर बाहर टहलने निकल गया.


शाम को लौट कर आया तो रजनी मिली और इतरा कर बोली- आज रात में तुमको मेरी और अपनी भाभी दोनों की सेवा करनी हैं!


मैंने कहा- ठीक हैं, लेकिन दोनों लोग रात में रेड कलर की साड़ी पहनना.

रजनी ने बोला- ठीक है.


मैं अब रात की तैयारी करने लगा.

मैंने फ्रिज में बर्फ जमने के लिए रख दिया.

फिर रात का खाना खाकर लेट गया और मोबाइल चलाने लगा.


आज रात गाने का प्रोग्राम जल्दी खत्म हो गया.

लगभग 11 बजे के बाद रजनी कमरे में आयी.


वह रेड साडी में कमाल लग रही थी.

मैंने पूछा- कब पहनी?


तो वह बोली- आज गाने के टाइम से ही पहन रखी थी … तुम अपनी बताओ … सेवा के लिेए तैयार हो?


मैं बोला- आओ तो सही पहले, छेद का कबाड़ा कर दूंगा.

वह हंस कर बाहर चली गयी.


मैं उठा और मैंने झट से सेक्स पॉवर बढ़ाने की दवा खा ली.


लगभग 20 मिनट बाद भाभी और रजनी दोनों साथ में आईं.

भाभी भी रेड कलर की साड़ी में थीं और कयामत ढा रही थीं.


उनके 36 इंच के चूतड़ बाहर को निकले हुए देखकर मन कर रहा था कि अभी पटक कर चोद दूं.

फिर मैंने सब्र करना ठीक लगा क्योंकि सब्र का मीठा फल मिलने वाला था.


रजनी मेरे बाईं तरफ आकर बैठ गयी और भाभी भतीजे को ठीक से कंबल ओढ़ाने लगीं.

फिर वे आकर दाईं तरफ बैठ गईं.


थोड़ी देर तक कमरे में एकदम सन्नाटा छाया रहा था.


फिर रजनी मुझे पकड़ कर किस करने लगी.

मैं भी रजनी को किस करने लगा.


एक हाथ से मैंने भाभी को अपनी तरफ खींचा तो भाभी एकदम से मेरे पास आ गईं.


मैंने रजनी को किस करना छोड़ा और भाभी को किस करने लगा.

भाभी गर्म सिसकरियां लेने लगीं ‘उम्ह … उम्ह … आह .. आह … सी …’


भाभी को किस करते हुए मैंने उनको चित लिटा दिया और खुद उनके ऊपर लेट कर उन्हें किस करने लगा.


अब बस कमरे से ‘उम् … आह … उम्ह … उम्ह … आह सी …’ की आवाज़ें आ रही थीं.


पीछे से रजनी आकर मेरे बालों पर हाथ घुमाने लगी.

मैं भाभी को किस कर रहा रहा था और एक हाथ से साड़ी के ऊपर से ही बाजू में लेटी रजनी के चूचे दबाने लगा.

सबके मुँह से मस्ती भरी आवाजें गूंजने लगी थीं.


मैं भाभी के गले पर चूमने लगा तो शायद भाभी ज्यादा उत्तेजित हो गई थीं.

उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया और आह … सी … की कामुक आवाज़ें भरने लगीं.


धीरे धीरे मैं भाभी की चूचियों तक पहुंच गया और ब्लाउज के ऊपर से ही उनकी एक चूची को भर कर काट लिया, जिससे भाभी चीख़ उठीं.


फिर मैंने भाभी की पूरी साड़ी निकाल दी और उनके पेट पर चूमने लगा.

मैं अपने दोनों हाथों से भाभी की चूचियां दबा रहा था और पेट पर चूम रहा था.


उनकी चुदास भरी आवाजें ‘आह … आह …. ईई … मुझे और ज्यादा कामुक कर रही थीं.


फिर मैंने रजनी से फ्रिज से आइस क्यूब और चॉकलेट लाने को कहा.

रजनी उठकर चॉकलेट और आइस क्यूब लाने चली गयी.


इसी बीच भाभी ने मेरी टी-शर्ट और लोवर निकाल कर फेंक दिया.

वे मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा कर मेरे ऊपर चढ़ गईं और मुझे होंठों पर किस करने लगीं.


मैंने भी भाभी का साया निकाल कर फेंक दिया.

अब वे सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई थीं और मैं केवल बरमुडा में था.


तब तक रजनी आ गयी और बगल में लेट गयी.

वह मुझे किस करने लगी.

मैं भी रजनी को किस करने लगा.


मेरे ऊपर चढ़ कर भाभी तो मेरे सीने के निप्पलों को अपनी जीभ से चाटती हुई उन्हें दांतों से पकड़ कर चूस रही थीं.


ठंड के मौसम में भी कमरे का मौसम एकदम गर्म हो गया था.


बस ‘आह … आह …. ईई … आह … सी.’ की कामुक आवाज़ें आ रही थीं.

आपको यह कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं।

धन्यवाद

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