Anjaan Rishta

कोई मिल गया चोदने वाला मुझे. एक दिन मैं घर में अकेली थी. मैंने अपने बॉयफ्रेंड को बुलाया लेकिन उसने मना कर दिया. तभी मेरे घर बिजली वाला आया. वह मुझे पसंद आ गया.


फ्रेंड्स, आज मैं पूजा आपको अपनी नई सेक्स कहानी बताने जा रही हूँ जो कि मेरे और एक बिजली ठीक करने के बीच में शुरू हुई.


फिर मैंने उसके लंड के साथ चुदाई का मजा खुल कर लिया.

उस बिजली वाले का नाम अमेन्द्र था.


यह बात अभी 7 दिन ही पुरानी है.


मेरे कमरे का पंखा खराब हो गया था.

मैंने मम्मी पापा से पंखा ठीक करवाने के लिए कहा.

तो पापा ने किसी को फोन किया.


पापा ने फोन काट कर मुझे बताया- पूजा, आज दिन में बिजली वाला आएगा. तुम उससे अपना पंखा ठीक करवा लेना. मैं और तेरी मम्मी बाहर जा रहे हैं, शाम तक घर आ जाएंगे.


फिर पापा और मम्मी चले गए.

उन्हें मौसी के घर जाना था और उधर कथा का आयोजन था, जिस वजह से उनके जल्दी लौट आने की संभावना न के बराबर थी.


उन दोनों जाने के बाद मैंने अपने बॉयफ्रेंड को फोन किया.

पर वह साला कहीं गया हुआ था.

तो मेरी चुत में लंड के लिए खुजली मचने लगी.


अब ऐसे तो किसी ऐरे गैरे को बुला नहीं सकती थी कि आ जाओ और मेरी चुत चोद दो.


हालांकि मैंने अपने ब्वॉयफ्रेंड के अलावा कई मर्दों के लंड अपनी चुत व गांड में लिए हैं, पर उनके लौड़े लेने के लिए कुछ अवसर मिले थे, जिन पर मैं उनके लौड़ों से चुद गई थी.


आजकल मेरे पास मेरे ब्वॉयफ्रेंड का ही इकलौता लंड था जो मुझे कभी कभी अपनी चुत चुदवाने के लिए मिल जाता था.


मैंने मन मसोस कर फोन पर एक पोर्न फिल्म लगा दी और नीचे से नंगी होकर चुत में उंगली करने लगी.


फिल्म काफी हॉट थी तो मैंने सारे कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी होकर अपने दूध मसलती हुई चुत में एक खीरा करने लगी.


बार बार मैं उस खीरे को चुत से निकाल कर चाट लेती थी और वापस चुत में डाल कर उससे अपनी चुत को चोदने लगती थी.


काफी देर बाद मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया.


फिर मैं नहाने घुस गई.

उधर मैंने अपनी चुत की सफाई की और झांटों को एक पुड़िया में बंद करके बाहर जाते समय फेंकने के लिए अलग रख दी.


मैंने नहाने के बाद बाहर आकर एक टी-शर्ट और चड्डी पहन ली.

उसके बाद मैं खाना खाकर टीवी देखने लगी.


तभी दरवाजे की घंटी बजी.


मैंने दरवाजा खोला, सामने एक 34-35 साल का आदमी खड़ा था.


उसने भी हाफ निकर और टी-शर्ट पहन रखी थी.


वह मुझे देख कर बोला- आपके पापा ने फोन किया था, पंखा ठीक करने के लिए!

मैं बोली- जी, मेरे ही कमरे का पंखा खराब है!


उसकी नजरों में मेरे लिए वासना दिखाई दे रही थी और उसकी कामुक निगाहें मेरे मम्मों पर ही टिकी थीं.


मेरी चुत की बत्ती पुनः सुलग उठी कि कोई मिल गया चोदने वाला!

मेरे सामने एक मस्त हट्टा-कट्टा मर्द खड़ा था और मेरी अनुभव नजरों ने समझ लिया था कि यदि यह मेरे ऊपर चढ़ गया तो मेरी जवानी की आग को बहुत अच्छे से बुझा सकता है.


मैंने उसको अन्दर आने को बोला.

वह अन्दर आ गया.


मैंने बड़े प्यार से उससे पूछा आप पानी लेंगे!

उसने हामी भर दी तो मैंने उसको पानी लाकर दिया.


अब मेरी नजर पुनः उसके लंड के ऊपर टिक गई.


उसके हाफ निकर में उसका फूला हुआ लंड साफ नजर आ रहा था.

मेरी नजर उसके लंड पर ही गड़ गई.


वह भी मेरी जवानी को भोगने की कामना कर रहा था तभी तो साले का लंड फूलने लगा था.


वह मेरे मम्मे देखता हुए बोला- जल्दी से पंखा दिखाओ, मुझे और भी बहुत काम है.

मैं उसको अपने कमरे में ले गई और पंखा ऑन करके दिखाया.


वह मुझसे बोला- एक स्टूल लेकर आओ.


मैं स्टूल लेकर आ गई.

वह स्टूल पर खड़ा होकर पंखा ठीक करने लगा और मैं उसके चड्डा में उठते हुए लंड को देखने लगी.


मेरी चुत उसके लंड के बारे में सोच कर गीली होने लगी.


तभी अचानक से मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैं उसके पास को गई और उसके चड्डा को मय कच्छे के नीचे खींच दिया.


वह अभी कुछ समझ पाता, उससे पहले ही मैंने उसके लंड को मुँह में ले लिया.

उसके हाथ पंखे से हट गए और मेरे सर के ऊपर आ गए.


मैं उसका लंड जोर जोर से चूसने लगी.


अब वह स्टूल से नीचे उतर आया.

मैंने उसके कपड़े उतार दिए और उसने मेरे कपड़े उतार कर दूर फेंक दिए.


वह मेरे होंठों से अपने होंठ लगा कर चूसने लगा.

मैंने भी अपनी जीभ उसके मुँह में दे दी और उससे अपनी लार चुसवाने लगी.


वह मेरे दूध पकड़ कर मसल हुआ मेरी जीभ को चूस रहा था.

फिर जब मुँह से मुँह हटा तो वह मेरे दूध पकड़ पकड़ कर चूसने लगा.


मैं भी सुलगती जवान लड़की उसके लौड़े से चुदने को मचल रही थी.


जल्दी ही हम दोनों जमीन पर ही 69 की पोजीशन में आ गए.

मैं अपनी चुत उसके मुँह पर रगड़ने लगी और उसके लंड को चूसती रही.


हम दोनों को ही बड़ा मजा आ रहा था.


उसकी तो लॉटरी निकल आई थी.

अनजाने में ही एक कड़क लौंडिया हाथ लग गई थी.




काफी देर बाद हम दोनों अलग हुए.


अमेन्द्र मुझसे बोला- साली देखने में तो बहुत शरीफ लग रही थी पर तू तो किसी रंडी से कम नहीं है.

मैं हंसती हुई बेड पर लेट गई.


तो अमेन्द्र बोला- साली, लेट कर तुझे चोदने में मजा नहीं आएगा, तुझे तो घोड़ी बना कर चोदूंगा मैं!

मैं जल्दी से घोड़ी बन गई.


अमेन्द्र ने मेरी गांड पर पहले प्यार से हाथ फेरा, फिर जोर का थप्पड़ दे मारा.

मैं पूरी हिल गई.


उसने फिर से एक और थप्पड़ मेरी गांड पर रसीद कर दिया.

मैं दर्द से कराह उठी- साले, मार क्यों रहा है?

वह बोला- तू मरवाने ही तो नंगी हुई है!


मैं हंस कर बोली- साले थप्पड़ लगवाने को थोड़ी नंगी हुई हूँ … चुत चुदवाने के लिए नंगी हुई हूँ.


यह सुनकर अमेन्द्र ने अपनी दो उंगलियां मेरी चुत में डाल दीं और अंगूठा मेरी गांड में डाल दिया.

मैं एकदम से चिहुंक उठी.


वह हंसने लगा और बोला- साली मादरचोद रंडी, पूरी चुदी हुई है तू तो … आज तेरी लेने में मजा आएगा.

वह दूसरे हाथ से मेरी गांड पर थप्पड़ मारने लगा.


इसके बाद उसने अपना मोटा लंड अपने हाथ से पकड़ा और मेरी चुत के छेद में लगा दिया.

फिर एक ही झटके में साले ने पूरा लंड मेरी चुत में उतार दिया.


मेरे मुँह से हल्की चीख निकल गई. अमेन्द्र मुझे किसी जंगली सांड की तरह चोदने लगा.

अमेन्द्र ने मुझे मेरे सर के बालों से पकड़ लिया और ताबड़तोड़ चोदता रहा.


वह बीच-बीच में मेरी गांड पर थप्पड़ भी मारता जा रहा था.

मैं उसके लौड़े से मस्त चुदाई के आगे दर्द को भूल गई थी और उसका पूरा साथ दे रही थी.


अमेन्द्र के तेज धक्कों के आगे मेरी चुत ज्यादा देर ठीक ही नहीं सकी और चुत ने पानी छोड़ दिया.

अमेन्द्र मुझे चोदता रहा.


उसके हर धक्के से मेरा पूरा शरीर हिल रहा था.


जल्दी ही मैं वापस गर्म हो गई और उसके लौड़े का मजा लेने लगी.

वह मेरे दोनों दूध मसलता हुआ मेरी ले रहा था.


मैं एक बार फिर से झड़ गई और अब मैं थक गई थी, पर अमेन्द्र नहीं रुका.


काफी समय बाद अमेन्द्र ने अपने धक्कों की गति तेज कर दी और मेरी चुत में ही अपने लंड का पानी छोड़ दिया.

मैं नीचे लेट गई और अमेन्द्र मेरे ऊपर चढ़ गया.


अमेन्द्र का लंड अभी भी मेरी चुत के अन्दर था.

मैं अमेन्द्र के साथ हुई मेरी चुदाई से अन्दर से बहुत खुश थी.


अमेन्द्र मेरे दूध मसलता हुआ बोला- साली कुतिया, पहले क्यों नहीं मिली थी तू, तुझे तो रोज चोदता मैं … चल अब से भी तेरी चुदाई रोज करूंगा मैं.

मैं बोली- आज बहुत दिन बाद एक मर्द से अपनी चुत चुदवाई हूँ मैं … अब आप ही मेरी चुत को को अपनी रांड की चुत समझ कर चोदा करना.


अमेन्द्र अब मेरे ऊपर से हट गया.

अमेन्द्र का मूसल लंड अब छोटा हो गया था.


मेरी चुत से उसके लंड का पानी बाहर आ रहा था.

मैंने उसके वीर्य को अपने एक हाथ से लेकर अपने मुँह में ले कर चाटने लगी.


मुझे ऐसा करते देख अमेन्द्र ने मुझे लंड मुँह में लेने को बोला.


मैंने झट से अमेन्द्र का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी.

अमेन्द्र मेरी गांड में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.


कुछ समय बाद ही अमेन्द्र का लंड फिर से तैयार हो गया.

मैंने लंड मुँह से बाहर निकाल दिया और घोड़ी बन गई.


अब मैंने अपनी गांड पर अपने एक हाथ से थूक लगाया.

अमेन्द्र मेरी गांड को मसल रहा था.


फिर अमेन्द्र ने लंड के सुपाड़े को मेरी गांड के छेद पर लगाया और एक झटका मारा.

उसका लंड फिसल कर चुत में आ गया.


अमेन्द्र बोला- साली गांड तो तेरी कुछ टाइट लग रही है!

ऐसा बोल कर अमेन्द्र ने मेरी गांड पर अपना थूक फेंक दिया और फिर से लंड को गांड के छेद पर लगा दिया.


इस बार अमेन्द्र ने मुझे कमर से पकड़ कर एक जोर का धक्का मारा.

उसका लंड मेरी गांड चीरता हुआ अन्दर चला गया.

मेरी जोर की चीख निकल गई.


अमेन्द्र ने फिर से एक धक्का मारा.

उसका पूरा लंड मेरी गांड में चला गया.


मुझे बहुत दर्द हुआ.

गांड में लंड जाते ही मेरी आंखों से आंसू आ गए.


अमेन्द्र मेरी गांड चोदने लगा.

मैं हर झटके में आगे को होने लगी.


अमेन्द्र बोला- साली गांड तो तेरी मस्त है … लगता है किसी गांडू ने तेरी थोड़ी सी गांड खोली है.

मैं दर्द से कराह कर बोली- गांड तो मेरी बहुत बार चुदी है, मेरा ब्वॉय फ्रेंड ही गांड का शौकीन नहीं है और भी कई आशिक हैं मेरे!


अमेन्द्र ने अब तक मेरी गांड में अपना पूरा लंड डाल दिया था और वह गांड चुदाई का मजा ले रहा था.


अमेन्द्र का हर एक धक्का मुझे गांड चुदाई की याद दिलवा रहा था.

अमेन्द्र को तो आज मेरे जैसी एक फ्री की रंडी चोदने के लिए मिल गई थी.


अमेन्द्र मुझे गंदी गालियां देते हुए चोदे जा रहा था.

मैं भी उसको गालियां दे रही थी और उससे बोल रही थी ‘चोद और जोर से चोद हरामी मुझे!


अमेन्द्र मेरी गांड पर कभी थप्पड़ मारता तो कभी मुझे बालों से पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगता.

काफी देर चोदने के बाद अमेन्द्र ने लंड गांड से बाहर निकाल लिया और मेरे मुँह में डाल दिया.


मैं भी उसका लंड चूसने लगी.


कुछ देर बाद अमेन्द्र ने लंड मेरे गले तक उतार दिया और लंड का पानी छोड़ दिया.

मैं सारा पानी पी गई.


मैंने उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया.

अमेन्द्र और मैं दोनों एक दूसरे की बांहों में लेट गए.


आगे बताऊंगी कि अमेन्द्र ने मेरी गांड की और कैसे चुदाई की.

फिर हम दोनों ने उस पूरे दिन कहां कहां और कैसे कैसे खुल कर चुदाई का मजा लिया.


कहानी पर आप अपने विचार जरूर बताएं.

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