Charmsukh
मुझे अपने फूफा जी बहुत हैण्डसम लगते थे, मैं उनके साथ अपना पहला सेक्स करना चाहती थी. एक दिन मैंने उन्हें प्रोपोस ही कर दिया.
दोस्तो, मैं कुमकुम हूँ. मेरी उम्र इस समय 21 साल है.
यह जो यंग गर्ल नीड सेक्स कहानी मैं आपको बताने जा रही हूँ, वह मेरी जिंदगी की हकीकत है.
मेरी बुआ की शादी अब से दो साल पहले राज से हुई.
राज की उम्र इस समय 30 साल है और वह एक बिजनेसमैन हैं.
अपने काम के सिलसिले में उनका हमेशा ही बाहर आना-जाना लगा रहता है और वह अक्सर हमारे यहां, यानि अपनी ससुराल में आते-जाते रहते हैं.
राज बहुत ही हंसमुख व्यक्ति हैं.
शादी के बाद से ही जब भी मैं राज फूफाजी को देखती, मेरे दिल में हलचल होने लगती थी.
वे मुझे बहुत अच्छे लगते थे और शायद मैं उनके जैसा ही पति चाहती थी.
बुआ भी हमेशा उनकी तारीफ करती रहती थीं.
एक बार मैंने बुआ को बात करते हुए सुना कि राज का रोमांटिक अंदाज़ और स्टैमिना बहुत लंबा है, वे बहुत देर तक टिकते हैं. राज हमेशा फुल मूड में रहते हैं और कभी भी, कहीं भी चालू हो जाते हैं.
हालांकि जब भी मुझे मौका मिलता, मैं राज फूफाजी से फोन पर घंटों बात करती थी.
हमारी बातें हमेशा शरारत भरी होती थीं और वे मुझे बहुत अच्छे लगने लगे थे.
आखिर एक दिन मैंने हिम्मत करके उन्हें प्रपोज़ कर दिया.
मैंने बात करते हुए कहा- राज फूफाजी, एक बात कहनी थी. आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं, मैं आपको चाहने लगी हूँ.
इस पर उन्होंने हंस कर कहा- समय आने पर मैं जवाब दूँगा.
उसके बाद भी हम फोन पर हमेशा बात करते रहे.
मेरा सवाल अब तक निरुत्तर रहा था.
अब हमारी बातें कभी गंभीर, तो कभी रोमांस से भरी होती थीं.
वे हमेशा मेरे कपड़ों के बारे में पूछते और कहते- मैं तुम्हें लहंगा-चोली में देखना चाहता हूँ.
एक बार बुआ और राज फूफाजी हमारे घर आए.
राज फूफाजी ने मुझे पहले ही अपने आने की खबर दे दी थी इसलिए मैं पार्लर जाकर तैयार हो चुकी थी.
लेकिन अगले दिन राज फूफाजी को दिल्ली किसी काम से जाना था तो वे दोनों आए और फूफा जी जाने की बात करने लगे.
जब वे लोग यह बात करने लगे तो मैंने जिद की कि मुझे भी आपके साथ दिल्ली चलना है क्योंकि मैं कभी दिल्ली नहीं गई.
मेरे मन में कुछ और ही प्लानिंग थी, यंग गर्ल नीड सेक्स को वे समझ चुके थे.
आखिर मेरे घर वालों ने भी मुझे इजाज़त दे दी और राज फूफाजी ने मेरा रिजर्वेशन भी अपने साथ करा लिया.
मैंने जाने से पहले अपनी चूत को अच्छे से साफ कर लिया और चिकनी कर ली.
वैसे भी मैं पहले ही पार्लर जाकर तैयार थी.
अगले दिन मेरा रिजल्ट आने के बाद कॉलेज में एक प्रोग्राम था.
उसी दिन हमारी ट्रेन रात 9 बजे जबलपुर से दिल्ली की थी.
मैं शाम 5 बजे प्रोग्राम में शामिल होने चली गई.
रात 8 बजे मेरे बड़े भाई ने मुझे प्रोग्राम से पिक किया और स्टेशन छोड़ा, जहां राज फूफाजी पहले ही पहुंच चुके थे.
मैंने उस समय व्हाइट टॉप और लाइट ब्लू जींस पहन रखी थी जिसमें मैं बहुत हॉट लग रही थी.
मेरा पूरा फिगर उन कपड़ों में साफ दिख रहा था.
रात 9 बजे गाड़ी आई और मैं और राज फूफाजी ट्रेन में चढ़ गए.
जल्द ही ट्रेन चल पड़ी.
हमारा रिजर्वेशन फर्स्ट एसी में था डबल कूपे वाले में.
मैं उन्हें अकेले देखकर बार-बार मुस्कुरा रही थी और शर्मा रही थी.
हमारी बातें शुरू हुईं.
मैंने समय देखते हुए फिर से उन्हें प्रपोज़ किया और कहा- राज जी, आपने जवाब नहीं दिया.
इस पर उन्होंने कहा- मेरी ओर से हां है. मैं भी तुम्हें पसंद करता हूँ. लेकिन हमारे रिश्ते की मर्यादा भी है. तुम्हें नापसंद करने की कोई वजह नहीं है.
यह कहते वे मेरी तारीफ करने लगे.
मैंने कहा- राज जी, आप चिंता मत करो. मैं कभी आपको धर्मसंकट में नहीं डालूँगी. आप बस मेरा पहला प्यार हो.
इतने में टीटीई आया और हमारा टिकट चेक करके बोला- आप लोग नए कपल हैं, इसलिए कूपे को अन्दर से लॉक करके रेस्ट कीजिए.
टीटीई के जाते ही राज फूफा जी ने दरवाजा लॉक कर दिया.
टीटीई की बात पर मुझे हंसी आ रही थी.
मैंने कहा- देखा, अब तो लोग भी हमें पति-पत्नी समझने लगे हैं.
वे मुस्कुरा दिए.
मैं भी हंसती हुई बोली- वैसे भी मुझे आपके साथ पत्नी का रिश्ता ही रखना है.
राज ने कहा- तो आज हमारी सुहागरात हम यहीं मनाएंगे.
मैंने मज़ाक में कहा- मुझे आपके साथ कोई सुहागरात नहीं मनानी. जाने कितने जालिम हो आप … न जाने क्या-क्या करोगे मेरे साथ? मैं तो एक नाजुक कली हूँ.
राज बोले- आज मैं तुम्हें कली से फूल बना दूँगा.
मैंने कहा- राज, मुझे चेंज करना है.
वह बोले- कर लो न चेंज … किसने रोका है?
मैं उनकी ओर बढ़ती हुई बोली- भागो, शरारती कहीं के. मुझे तुम्हारे सामने चेंज नहीं करना. वैसे भी तुम्हारे रहने से मुझे शर्म आ रही है. कहीं तुम कोई शरारत न कर दो.
यह सब मैं शर्माती और मुस्कुराती हुई बोल रही थी.
वे बोले- ठीक है, मैं बाहर से आता हूँ. वैसे भी मुझे तुम्हें कुछ अलग ही देखना है, जो अब तक मैंने नहीं देखा.
यह कह कर फूफा जी बाहर चले गए.
मैंने जल्दी से अपने बैग से रेड प्लेन लहंगा-चोली निकाली और चेंज कर लिया.
मैंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था यानि न ब्रा, न पैंटी.
फिर मैंने आईने में खुद को देखा. ब्लाउज पीछे से बैकलेस था, एक डोर से बंधा था और आगे से बहुत गहरे गले का था, जिसमें मेरे क्लीवेज साफ दिख रहे थे.
लहंगे को मैंने नाभि से नीचे से बाँधा ताकि मेरी नाभि साफ साफ दिखे.
मैंने हाथों में चूड़ियां और मेहंदी पहले से ही लगा रखी थी.
पैरों में पायल और होंठों पर रेड लिपस्टिक लगाई.
मेरे बाल खुले थे, जो कुछ दिन पहले ही स्ट्रेट कराए थे.
मेरा पेट साफ दिख रहा था और पीठ पूरी बैकलेस थी.
जब मैंने आईने में देखा, तो मैं हॉट और सेक्सी लग रही थी.
मेरे अंग-अंग का एक-एक कटाव साफ दिख रहा था.
मेरी 21 साल की उम्र और 32-28-34 का फिगर.
मेरे बूब्स एकदम टाइट थे और मेरी गांड हल्की बाहर को निकली थी.
इसलिए मेरी बॉडी लहंगा-चोली में बहुत हॉट लग रही थी.
मैंने लाइट ऑफ कर दी, रेड ओढ़नी ली और पीठ के बल लेट गई.
ओढ़नी को मैंने चादर की तरह ढक लिया और चेहरा भी ढक लिया था.
मैंने राज फूफा जी को कॉल किया- आ जाइए, मैंने चेंज कर लिया है.
मैंने दरवाजा पहले ही अनलॉक कर दिया था.
मेरे मन के अरमान अब पूरे होने वाले थे.
आज मैं अपने प्यार को पूरे दिल से सब कुछ अर्पण करने वाली थी.
यह सोचते ही मेरी चूत हल्की-हल्की गीली होने लगी थी और मेरे अन्दर एक अजीब-सी गुदगुदी होने लगी थी.
आज मैं पहली बार चुदने वाली थी, वह भी अपने पहले प्यार के साथ.
इतने में दरवाजा खुला और राज फूफाजी अन्दर आ गए.
उन्होंने दरवाजा लॉक किया.
वे उस समय कुर्ता-पायजामा पहने थे.
उन्होंने लाइट ऑन की और मुझे एकटक देखते रह गए.
मैंने शर्माते हुए कहा- राज, प्लीज लाइट ऑफ कर दो. मुझे शर्म आ रही है. तुम्हारे इस तरह देखने से ही मुझे शर्मिंदगी हो रही है.
जवाब में उन्होंने लाइट ऑफ कर दी.
लेकिन फिर भी इतनी रोशनी थी कि हम एक-दूसरे को साफ देख सकते थे.
साथ ही उन्होंने जीरो वाट का बल्ब चालू कर दिया.
मैंने कहा- राज देखो … मैंने ये कपड़े सिर्फ इसलिए पहने क्योंकि तुम्हारी यही इच्छा थी!
मैं लेटी थी और राज जी मेरे पास आकर मुझसे सटकर बैठ गए.
उन्होंने मेरी चुनरी को धीरे-धीरे मेरे शरीर से हटा दिया.
वे मुझे एकटक देखने लगे.
मैंने कहा- राज … जैसा तुमने कहा था कि मुझे लहंगा-चुनरी में देखना चाहते हो, आज मैं वैसे ही तुम्हारे सामने हूँ.
मैंने अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को ढक लिया, अपने शरीर को छुपाने की कोशिश करते हुए.
मैं राज को अपने क्लीवेज देखने से रोक रही थी और शर्माती हुई बोली भी कि राज, प्लीज ऐसे मत देखो न!
हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में खोए हुए थे.
मैंने फिर से कहा- राज, मुझे इस तरह मत देखो. मुझे शर्म आ रही है. अपनी नजरें हटा लो.
राज ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और उन्हें ऊपर उठा दिया.
उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि मेरा कोई जोर उनके सामने नहीं चला.
मैंने अपने हाथ छुड़ाने की हल्की कोशिश की.
लेकिन अब मैं पूरी तरह उनके बस में थी.
वे अपने पूरे शरीर को मेरे ऊपर ले आए और मेरे ऊपर लेट गए.
पहली बार कोई मेरे इतने करीब था, लेकिन मुझे इसका अहसास भी नहीं हो रहा था.
राज फूफा जी ने मेरे निचले होंठों के पास अपने होंठ लाए और उन्हें चूमने, काटने और चूसने लगे.
उन्होंने मेरी लिप्सटिक तक चूस ली.
मैं तो मानो मदहोश-सी होने लगी.
वे मेरे निचले होंठ को बुरी तरह चूस रहे थे और मैं मछली की तरह तड़प रही थी.
मेरा शरीर जैसे जलने लगा था.
धीरे-धीरे वे मेरे गले पर आए और वहां चूमने लगे.
वे जंगली अंदाज में मेरे शरीर को अपने दांतों से चूस रहे थे.
मेरे अन्दर एक अजीब-सी गुदगुदी छाने लगी थी.
मेरी चूत तो पूरी तरह गीली हो चुकी थी.
मैंने अपने होंठ काटे, आंखें बंद कीं और मदहोश होकर राज फूफा जी को अपना काम पूरा करने में साथ दे रही थी.
लेकिन नीचे मेरी चूत का हाल और भी बुरा था जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी … जीवन में पहली बार.
मेरी हालत खराब होती जा रही थी.
शायद पहली बार कोई मेरे जिस्म से इस तरह खेल रहा था.
वे धीरे-धीरे मेरे बूब्स की ओर बढ़े और ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें चूमने लगे.
मेरे क्लीवेज की लाइनिंग पर भी वह अपने होंठ चला रहे थे.
लेकिन उन्होंने मेरे हाथ नहीं छोड़े और मैं तड़पती रही.
मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं ‘आह … आह … आह …’
फिर वे और नीचे मेरे पेट पर चूमने लगे.
उन्होंने मेरे हाथ छोड़ दिए.
पहले तो मैंने अपने हाथ रोक रखे और अंगड़ाई लेने लगी.
लेकिन कुछ देर बाद मेरे हाथ अपने आप राज जी के बालों में चले गए और उन्हें सहलाने लगे.
मैं उनके सिर पर दबाव भी बना रही थी.
राज फूफा जी मेरे पेट को चूमते हुए अपने होंठों से सहला रहे थे.
मैं आंखें बंद कर, मदहोश होकर मजे में खो रही थी.
अचानक राज फूफा जी ने मेरे लहंगे का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे करने लगे.
मैंने अन्दर कुछ नहीं पहना था, इसलिए मुझे शर्मिंदगी हो रही थी.
मैंने उनके हाथ रोकने की कोशिश की लेकिन आखिरकार वे जीत गए.
देखते ही देखते उन्होंने मेरे लहंगे को मेरे शरीर से अलग कर दिया.
अब मैं उनके सामने नीचे से निर्वस्त्र थी.
शर्म से पानी-पानी होकर मैंने अपनी चूत को दोनों हाथों से ढकने की नाकाम कोशिश की.
तभी राज फूफा जी उठे और अपने सारे कपड़े उतार दिए.
उनका खड़ा लंड अब मेरी आंखों के सामने था.
वे मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए.
उन्होंने मेरे पैरों को सहलाते हुए अचानक उन्हें अपनी ओर खींचा.
फिर मेरे दोनों हाथ पकड़कर मुझे उठाया और सीधे अपनी गोद में बिठा लिया.
मैंने उनके इस अंदाज के बारे में कभी सोचा भी नहीं था.
उधर राज फूफा जी का लंड मेरी चूत के आसपास टकरा रहा था.
मेरे अन्दर एक अजीब-सी हलचल पैदा हो रही थी क्योंकि मैं जानती थी कि अब कुछ ही क्षणों में उनका लंड मेरी चूत के अन्दर होगा.
राज ने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर स्मूच करने लगे.
अब मेरी शर्म भी छूट चुकी थी, इसलिए मैं भी उनका साथ देने लगी.
उस पल हमारी जीभें आपस में टकरा रही थीं और मैं उस मजे को पूरी तरह ले रही थी.
हमारा स्मूच चरम सीमा पर था.
उधर राज फूफा जी ने मेरे बालों को एक तरफ करते हुए मेरे ब्लाउज की पीछे की डोरी को खोल दिया.
अब मेरा ब्लाउज ढीला हो चुका था, जिसे उन्होंने कुछ ही क्षणों में मेरे शरीर से अलग कर दिया.
अब मैं उनके सामने पूरी तरह निर्वस्त्र थी.
राज ने मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया और प्यार करने लगे.
मेरे बूब्स उनकी छाती से दब चुके थे.
मुझे राज फूफा जी को कुछ बोलने या समझाने की जरूरत ही नहीं पड़ रही थी.
वे अपनी मर्जी से मेरे शरीर के साथ खेल रहे थे.
कभी वे मेरी पीठ को सहला रहे थे, कभी मेरे बालों को खींचकर उन्हें सहला दे रहे थे, तो कभी मेरे गालों पर चुंबनों की बौछार कर रहे थे.
कभी वे मेरे बालों को खींचते हुए मेरे गले पर चुंबन ले रहे थे और थोड़ा नीचे होते हुए मेरे स्तनों पर भी चुंबन ले रहे थे.
मैं भी उनके साथ चिपक कर उनके बालों को सहलाती हुई उन्हें उत्तेजित करने में लगी थी.
अब तो राज फूफा जी ने मेरे स्तनों को एक-एक करके चूसना शुरू कर दिया था और मेरी उत्तेजना को बढ़ाने में जुट गए थे.
उन्होंने अपना एक हाथ मेरी पीठ पर रखा था और दूसरे हाथ से मेरे स्तनों को पकड़ कर कभी दबाते तो कभी एक दूध को चूस लेते.
फिर अचानक वह समय आ गया, जिसका शायद मुझे और उन्हें इंतज़ार था.
राज फूफा जी का लंड मेरी चुत के आसपास ही घूम रहा था.
उन्होंने अपना हाथ मेरी गांड के पास ले जाकर उसे हल्का सा उठाया और अपने लंड को मेरी चुत के मुहाने पर ले आए.
फिर फूफा जी ने मुझे अपनी ओर चिपका लिया.
उनका लंड मेरी चुत के अन्दर घुस चुका था.
एक ही बार में पूरा लंड चुत में समा गया था.
मुझे बहुत ज्यादा दर्द भी हुआ, इतना ज्यादा कि मेरी आंखों से आंसू निकल आए.
मैं छटपटाने लगी, जिसे समझते हुए राज फूफा जी मेरे होंठों को चूसने लगे.
कुछ देर बाद राज फूफा जी ने मेरी आंखों में आंखें डालीं और फिर से जोरदार धक्के के साथ अपना लंड मेरी चुत में अन्दर कर दिया.
उन्होंने मेरी गांड को अपनी तरफ खींचते हुए यह प्रहार किया था.
इस बार मुझे बहुत ही ज्यादा दर्द हुआ और मैं छटपटाने लगी.
मैं उन्हें अपने से दूर करने लगी और मेरे मुँह से जोर से आवाज़ निकली- आह आह आह … मम्मी, मर गई.
मेरी आंखों से आंसुओं की धार निकलने लगी.
दोस्तो, मैं अपनी कुंवारी चुत की सील तुड़वा कर एक बार तो पछताने लगी थी कि इतना दर्द की नहीं सोची थी.
राज फूफा जी ने मुझे दर्द से तड़फते हुए देख कर मुझे लेटा दिया.
लेकिन उन्होंने अपना लंड मेरी चुत से नहीं निकाला और वे मेरे ऊपर लेट कर पूरी तरह से छा गए.
वे मुझे सहलाने लगे, मेरे स्तनों को अपने हाथों से सहलाते हुए चुंबन लेते रहे.
कुछ देर बाद जब मैं थोड़ा सामान्य हुई तो राज फूफा जी फिर से अपना लिंग अन्दर-बाहर करने में जुट गए.
इस बार वे मेरी आंखों में आंखें डालकर मुझे चोद रहे थे.
मैं भी अब मज़ा ले रही थी क्योंकि अब मुझे भी मज़ा आने लगा था.
मेरा दर्द मज़े में बदल चुका था और मेरी चुत की सील टूट चुकी थी.
हालांकि मेरी चुत कई बार पानी छोड़ चुकी थी जिस वजह से चुत में चिकनाई काफी ज्यादा हो गई थी और लौड़े की मोटाई अब दर्द की जगह मजा देने लगी थी.
फूफा जी एक शातिर खिलाड़ी की तरह मुझे सहलाते हुए चोद रहे थे.
साथ ही वे मुझे बार-बार चुंबन भी कर रहा था.
उन्होंने मेरे चेहरे, होंठ, जीभ, आंखों, यहां तक कि मेरे स्तनों को भी खूब चूसा.
उस दौरान मेरा पानी बार बार गिर रहा था और मेरे आनन्द की कोई सीमा नहीं थी.
मैं तो बस उस हसीन चुदाई का मज़ा ले रही थी.
मैं बोल रही थी- राज … आह अह … करो … मज़ा आ रहा है. सच में राज, आज से पहले कभी इतना मज़ा नहीं आया. ओह ओह … आह आह … यस यस फक मी.
मेरी चूड़ियां भी लौड़े की लय के साथ बज रही थीं.
तभी राज ने अपना लंड मेरी चुत से निकाला और मेरे पूरे शरीर पर चुंबन करते हुए नीचे की ओर बढ़ने लगे.
अब वे मेरे पैरों तक पहुंच गए और मेरे एक पैर को पकड़ कर उठाया.
मेरी आंखों में देखते हुए फूफा जी ने मेरे पैर के अंगूठे को चूसना शुरू कर दिया.
उनकी इस हरकत से मेरी चुत फिर से गीली हो गई.
तभी राज फूफा जी ने अचानक मेरे पैर को घुमाया और मुझे पलट दिया.
अब मेरी पीठ उसके सामने थी.
राज फूफा जी ने मेरे शरीर को सहलाते हुए ऊपर की ओर बढ़ना शुरू किया.
उन्होंने मेरी गांड पर दो-चार जोर से चपत भी मारी.
मैंने पलट कर उनकी ओर देखा और नज़रों से पूछा कि यह क्या कर रहे हो?
जवाब में राज फूफा जी ने मेरे बालों को पकड़ कर खींचा.
फिर अपनी गांड के पास अपना लंड लाकर मेरी चुत पर पीछे से सैट कर दिया.
उनके इस तरीके से मैं मदहोश होने लगी.
उन्होंने जल्द ही पीछे से मेरी चुत पर लंड सैट किया और एक ही शॉट में उसे अन्दर घुसा दिया.
मुझे फिर से दर्द हुआ लेकिन इस बार राज फूफा जी रुके ही नहीं.
वे अपना लिंग अन्दर-बाहर करने लगे.
चुदाई के साथ ही कभी वे मेरी पीठ पर चुंबन ले लेते, तो कभी मेरे बालों को जोर से खींच लेते.
मैंने अपना मुँह उनकी ओर किया, तो उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और उन्हें काटने-चूसने लगे.
साथ ही राज अपना हाथ आगे करके मेरे स्तनों को जोर से दबा रहे थे.
लेकिन उन्होंने एक पल के लिए भी अपनी चुदाई का कार्यक्रम बंद नहीं किया.
मेरी चुत कई बार स्खलन कर चुकी थी.
मैं अब फूफा जी का नाम लेते हुए बोल रही थी- आह राज डार्लिंग … जल्दी जल्दी करो … मज़ा आ रहा है!
लेकिन राज फूफा जी थे कि थकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.
मुझे भी उनके हर धक्के पर मज़ा बढ़ता जा रहा था.
आखिर में राज ने मेरे मुँह में अपनी उंगली डालते हुए कहा- कुमकुम, मेरा होने वाला है.
मैंने समझा भी नहीं कि क्या बोलना है.
आखिरी के 15-20 जोरदार शॉट मारते हुए राज फूफा जी ने मेरी चुत में अपना सारा वीर्य गिरा दिया और वैसे ही मेरे ऊपर निढाल होकर गिर गए.
वे मेरी पीठ को चूमते हुए मेरे स्तनों को सहला रहे थे.
मेरा शरीर भी पूरी तरह थक चुका था.
उसी हालत में हम लोग करीब 10 मिनट रहे होंगे.
फिर राज फूफा जी उठे और बोले- कुमकुम, मैं आता हूँ.
मैंने उठकर अपनी चुत को देखा, जिस पर खून लगा था.
मैंने उसे पहले साफ किया, फिर अपना लहंगा पहना ही था कि राज फूफा जी वापस आ गए.
उन्होंने अन्दर आते ही गेट लॉक किया और लाइट्स चालू कर दी.
लाइट चालू होते ही मैं शर्मा गई और अपने स्तनों को दोनों हाथों से ढककर राज फूफा जी के सामने खड़ी हो गई.
फिर वे बोले- तुम बस इतने ही कपड़ों में अच्छी लग रही हो.
मैंने कहा- तुम्हें शर्म नहीं आती? एक जवान लड़की के सामने इस तरह देखते हुए खड़े हो!
राज फूफा जी आगे बढ़े.
मैं बोली- क्या … इतना करके अभी तक थके नहीं?
राज फूफा जी ने कहा- अभी तो सारी रात बाकी है. वैसे भी आज मैं तुम्हें सोने तो देने वाला नहीं हूँ.
वे मेरी ओर आने लगे.
मैं घूमकर सामने वाली दीवार के पास खड़ी हो गई.
राज फूफा जी के सामने मेरी पूरी बैकलेस पीठ थी.
राज फूफा जी ने सही मौका पाते हुए मेरे बालों को हटाते हुए मेरी पीठ पर चुंबनों की बौछार कर दी.
उन्होंने कहा- काश कुमकुम, तुम मुझे पहले मिली होतीं!
मैंने जवाब दिया- लेकिन अब तो मिल गई हूँ न!
इस पर राज फूफा जी ने पीछे से ही मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
उधर उनका एक हाथ मेरे बूब्स पर चला गया.
धीरे-धीरे मेरे हाथों को हटाते हुए उन्होंने मेरे बूब्स को अपने दोनों हाथों से दबाना और मसलना शुरू कर दिया.
मैं तो शर्म से पानी-पानी हो रही थी.
राज फूफा जी मेरे बूब्स दबाने के साथ-साथ अब धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगे थे.
वे मेरी पीठ और कमर पर चुंबन लेने लगे.
उधर मेरी चूत का बुरा हाल हो रहा था और मैं कसमसा रही थी.
अब मैं राज से दूर हटते हुए सीट पर जाकर बैठ गई, अपने बूब्स को छुपाते हुए.
राज मुस्कुराते हुए मेरे पास आया और मेरे पैरों को खींचकर मुझे लेटा दिया.
फिर उन्होंने मेरे लहंगे को अपने हाथों से ऊपर करना शुरू किया और उसे मेरी कमर तक ले आए.
अब मेरी चूत फूफा जी के सामने थी, जिसे वे बड़ी ही ललचाई नजरों से देख रहे थे.
राज फूफा जी मेरी जांघों को सहलाते हुए धीरे-धीरे अपने चेहरे को मेरी जांघों पर ले आए और फिर उन्होंने अपने होंठों को मेरी पिंक चूत पर रख दिया.
पहले उन्होंने ऊपर से चुंबन लेना शुरू किया और उन्होंने मेरी चुत को अपनी जीभ से कुरेदना और काटना शुरू कर दिया.
मेरी चूत तो पहले ही गीली हो चुकी थी और पानी भी छोड़ चुकी थी.
राज फूफा जी ने अब अपनी जीभ को मेरी चूत के दाने पर और फिर चूत के अन्दर ले जाकर गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया.
मेरे हाथ मेरे बूब्स को छोड़कर उनके सिर तक चले गए और मैं उनके सिर को दबाने लगी ताकि वे और ज्यादा अपनी जीभ को मेरी चूत में डालकर उससे खेलें.
साथ ही अब मेरी आहें भी निकलने लगीं.
मैं बोल रही थी- आह राज … ऐसे ही करो … आह और अन्दर तक … मजा आ रहा है. बस करते रहो ओह राज, आह आह!
राज फूफा जी अपनी मस्ती में मेरी चुत को चाट रहे थे.
‘सच राज, बुआ सच कहती थीं, तुम असली मर्द हो. आज मैं सच में तुम्हारी हो गई!’
काफी समय बाद राज फूफा जी ने मुझे छोड़ा और सीट पर बैठ गए.
वे मेरी ओर देखकर मुस्कुराने लगे और मैं अपने चेहरे पर एक हारी हुई मुस्कान के साथ शर्माती हुई उनकी ओर देख रही थी.
राज फूफा जी ने कहा- चल आ जा मेरी रानी. तुझे आज जन्नत दिखाता हूँ.
फूफा जी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खड़ा किया और फिर मुझे घुटनों के बल बैठने को कहा.
मैं जैसे ही घुटनों के बल बैठी, राज फूफा जी ने मेरे चेहरे को पकड़ कर पहले मेरे माथे पर एक चुंबन लिया और मेरे बालों को एक साथ करते हुए मेरे चेहरे को अपने लंड के सामने ले आए.
अब मेरा चेहरा उनके लंड के सामने था और उनका लंड फुल स्टैंड पोजीशन में खड़ा था.
मैं जान रही थी कि राज फूफा जी अब क्या करने वाले हैं.
राज फूफा जी ने अपने लंड को पहले मेरे होंठों पर रगड़ा.
फिर उन्होंने मुझसे कहा- अपना मुँह खोलो.
मैंने अपना मुँह खोला तो फूफा जी ने अपने लंड को सीधा मेरे मुँह में घुसा दिया और कहा- मेरी कुमकुम रानी, चूस ले … बहुत मजा आएगा हम दोनों को!
राज फूफा जी की बात मानते हुए मैं उसके लंड को चूसने लगी.
साथ ही वे अपने हाथों से मेरे सिर को ऊपर नीचे करते हुए अपने लंड को चुसवाने लगे.
कुछ देर तो मुझे अजीब लगा लेकिन उसके बाद मुझे भी काफी मजा आने लगा और मैं उनका साथ देने लगी.
अब तो मेरे मुँह से आवाजें भी आने लगी थीं जिससे राज फूफा जी और मस्ती में आ जाते और मेरे बालों को पकड़ कर अपने लंड पर थपथपाने लगते.
साथ ही वे बीच-बीच में अपने हाथों से मेरे बूब्स को जोर से पकड़ कर निचोड़ भी देते.
मुझे मजा तो आ रहा था लेकिन साथ ही फूफा जी का लंड मेरे गले तक चला जाता, जिसके कारण मेरा दम भी घुटने लगता.
काफी देर बाद राज फूफा जी ने मुझे छोड़ा और मैं उनसे दूर हटकर खड़ी हो गई.
तभी राज फूफा जी फिर से खड़े हुए और उन्होंने मुझे अपने दोनों हाथों में ऐसे उठा लिया मानो मैं कागज सी हल्की हूँ.
उनका एक हाथ मेरी कमर पर और दूसरा हाथ मेरे घुटनों पर था.
उसी पकड़ को मजबूती देते हुए उन्होंने मुझे पकड़ कर उठा लिया.
अब मैं सिर्फ उनकी आंखों में देख रही थी.
राज फूफा जी मुझे वैसे ही लेकर बर्थ पर बैठ गए.
मैंने अपनी बांहों को उनके गले में डाल रखा था.
अब वे धीरे-धीरे मेरे चेहरे को अपनी ओर ले जाने लगे.
साथ ही उन्होंने अपना हाथ मेरे लहंगे को ऊपर करने में लगा दिया.
कुछ पल बाद फूफा जी ने मेरे होंठों पर चुंबन लेना शुरू कर दिया और साथ ही नीचे मेरी जांघों पर सहलाने लगे.
मेरे बूब्स उनकी छाती से लगकर दब रहे थे.
ऊपर उनकी जीभ मेरे मुँह में आ चुकी थी और हमारा स्मूच शुरू हो गया.
साथ ही उन्होंने मेरी पीठ पर भी हाथ चलाना जारी रखा.
उधर नीचे मेरी चूत का बुरा हाल हो रहा था और चूत से पानी भी आने लगा था.
राज फूफा जी ने फिर से मेरे लहंगे के बंधन को खोल दिया और धीरे-धीरे मेरे लहंगे को मेरे शरीर से निकाल दिया.
इस तरह से एक बार फिर से उन्होंने मुझे पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया.
कुछ देर तक वे मेरे शरीर के साथ प्यार करते रहे.
फिर उन्होंने अपना मुँह नीचे करके मेरे बूब्स को चूसना शुरू कर दिया.
लेकिन इस बार वे पूरे वेग से चूस रहे थे, यहां तक की काट भी ले रहे थे.
मैं भी उनका साथ दे रही थी, उनके सिर पर हाथ रख कर अपने बूब्स पर दबा रही थी.
मेरी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं- ओह राज … और चूसो उह … उह … मजा आ रहा है!
फिर उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरे पीछे आ गए.
उन्होंने मेरे बालों को आगे की ओर करते हुए मेरी पीठ पर किस करना शुरू कर दिया.
वे मेरी गर्दन को भी चूसने लगे.
इसके बाद उन्होंने अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाते हुए मेरे दोनों बूब्स पर रख दिया.
पहले वे हल्के-हल्के से मेरे दूध सहलाने लगे, फिर जोर जोर से दबाने लगे.
मैं बस उस पल का मजा ले रही थी.
कुछ देर बाद उन्होंने मेरे दोनों हाथों को सीट पर रखवाया और मेरी पीठ पर किस करते हुए मेरी गांड तक आ गए.
उन्होंने पहले बहुत प्यार से मेरी गांड को किस किया.
मैं पीछे मुड़कर यह सब देख भी रही थी.
इस दौरान मेरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी.
अब वह खड़े हुए और उन्होंने अपने लंड को पहले मेरी चूत पर रगड़ा.
मेरा सारा पानी उनके लंड पर लग गया.
फिर उन्होंने अपने फुल स्टैंड लंड को मेरी गांड पर सैट कर दिया और मेरी कमर पकड़ते हुए हल्का सा पुश किया.
मेरी गांड एकदम टाइट होने के कारण बंद थी जिस वजह से लंड अन्दर नहीं जा रहा था; बस उनका टोपा मेरी गांड पर सटक रहा था.
मैंने राज फूफा जी की ओर देखा और कहा- क्या एक ही दिन में सब कुछ कर लोगे?
इस पर राज फूफा जी ने मेरी गांड पर जोरदार चपत मारते हुए कहा- आज ही तुम्हें पूरी औरत बनाना है, तो तैयार हो जा मेरी कुमकुम.
फिर उन्होंने एक बार फिर से अपना लंड मेरी गांड पर सैट किया और धीरे-धीरे अन्दर करने लगे.
पहले तो मुझे बहुत दर्द हुआ लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपना लंड मेरी गांड के अन्दर लगभग डाल ही दिया.
दर्द के कारण मेरा बुरा हाल हो रहा था फिर भी मैं आगे के मजे के लिए उनके साथ देने लगी और इस दर्द को सहने लगी.
कुछ देर बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.
पहले तो मुझे काफी दर्द हुआ, लेकिन धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और शायद मजा भी आने लगा.
जब मैं पूरी तरह नॉर्मल हो गई तो उन्होंने मेरी गांड में लंड अन्दर-बाहर करना तेज कर दिया.
उनकी स्पीड इस बार ज्यादा नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्पीड बढ़ने लगी.
अब वे पूरी तरह मेरी गांड मार रहे थे और मुझे भी अब मजा आने लगा था.
राज फूफा जी बीच-बीच में कभी मेरे बालों को खींचते, तो कभी मेरी पीठ पर झुककर किस ले लेते.
कभी आगे हाथ डालकर मेरे बूब्स को पकड़ते, सहलाते और दबा देते.
कभी-कभी मेरी गांड पर चपत भी मारते.
साथ ही वे मेरी गांड की तारीफ भी करते कि कैसे नॉर्मल पोजीशन में भी मेरी गांड निकली रहती है … मेरा पिछवाड़ा कितना आकर्षक है.
लेकिन उन्होंने पीछे से गांड मारना नहीं रोका.
इस दौरान मेरी चूत से पानी की धार निकल कर मेरे पैरों तक आ गई थी.
मेरे बाल पूरी तरह बिखर चुके थे.
बहुत देर बाद उन्होंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी.
कुछ देर बाद उन्होंने अपना सारा वीर्य मेरी गांड में डाल दिया और मेरी पीठ के ऊपर निढाल होकर गिर गए.
फिर वे मेरी पीठ पर किस करने लगे.
हम दोनों उसी पोजीशन में एक सीट पर लेट गए.
धीरे-धीरे उनका लंड मेरी गांड से निकल गया.
मेरा सारा शरीर दर्द करने लगा था और मैं उनसे बात करते-करते कब सो गई, पता ही नहीं चला.
सुबह जब उठी, तो राज फूफा जी मुझसे चिपक कर सो रहे थे.
मैं रात की ओल्ड यंग चुदाई की बातें याद करके सोच रही थी कि कितनी हसीन रात बीती थी.
फिर मैंने राज फूफा जी के गाल पर किस करके उन्हें जगाया.
वे भी जाग गया और मुझे और करीब से चिपका लिया.
मैंने कहा- देखो मिल गई न तुम्हें कुमकुम!
वे बोले- कुमकुम, अब सिर्फ मेरी ही रहेगी.
मैंने कहा- चलो, अब दिल्ली आने वाला है.
फिर हम दोनों उठे, अपने कपड़े पहने और तैयार हो गए.
कुछ देर बाद स्टेशन भी आ गया. आगे की कहानी अगली बार.
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