LADLA DEVAR
भाभी मेरे घर तब आई जब मेरे भाई की शादी हुई. भाभी की गोरी-मखमल त्वचा और उनके नितंबों की मनमोहक बनावट मुझे बार-बार खींचती थी.
सभी पाठकों को एक गहरा और प्यार की भावनाओं से भरा नमस्कार.
इच्छाओं और कामनाओं के इस रंगीन संसार में यह मेरा पहला कदम है, मेरी पहली सेक्स कहानी.
या यूँ कहूँ कि यह हमारी भाभी की कहानी है जो कुछ इस तरह से शुरू होती है.
हम लोग कर्नाटक के उत्तरी हिस्से से ताल्लुक रखते हैं जहां की मिट्टी में मेहनत और संस्कारों की खुशबू बसी है.
घर में भैया की शादी की बातें जोर-शोर से चल रही थीं.
इस बीच पुराना घर छोटा पड़ने लगा, तो नए घर के निर्माण का सिलसिला शुरू हुआ.
नए घर की पहली मंजिल पर मेरा और भैया का कमरा एक-दूसरे के बगल में ऐसे बनाया गया, मानो दोनों की दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी हो.
शादी के बाद जब भाभी घर आईं, तब पता चला कि वे मुझसे तीन साल बड़ी हैं.
उनका व्यक्तित्व और सौंदर्य ऐसा था, मानो कोई अप्सरा धरती पर उतर आई हो.
उनकी कद-काठी 5 फुट 4 इंच की थी और उनका मादक शरीर 36-30-38 के आकार में ढला हुआ था, जो हर किसी का ध्यान खींच ले.
मैं भी कम न था.
मेरी साढ़े पांच फीट की सुगठित देह और 7 इंच का आत्मविश्वास से भरा हुआ मूसल लंड, जो भैया से कुछ ज्यादा ही मोटा था, जैसा कि भाभी ने एक बार हंसते हुए बताया.
भाभी की बात करूँ तो उनकी गोरी-मखमल सी त्वचा और उनके नितंबों की वह मनमोहक बनावट मुझे बार-बार अपनी दुनिया से बाहर खींच लाती थी.
जब वे रसोई में खाना बनातीं, फ्रिज से कुछ निकालतीं या झुककर कोई काम करतीं, तो समय ठहर सा जाता था.
उनकी हर अदा में एक जादू था, जो मेरे होश उड़ा देता था.
घर में भाभी की साड़ी उनके जिस्म पर ऐसे लिपटी रहती थी, जैसे हवा का कोई हल्का सा स्पर्श.
वे ज्यादातर साड़ी ही पहनती थीं शायद इसलिए कि उन्हें पता था कि साड़ी में उनकी खूबसूरती और भी निखरती है और यह मर्दों को कितना ज्यादा तड़पाता है.
उनकी साड़ी हमेशा कमर से नीचे बँधी होती, जिससे उनकी नाजुक कमर और नाभि का वह हिस्सा नजर आता, जहां से उनकी देह की और भी रहस्यमयी दुनिया शुरू होती थी.
जब सिर्फ हम दोनों ही आसपास होते, तब वे अपने पल्लू को हल्का सा सरकने देतीं और उनकी चूचियां व कमर की झलक मेरे दिल को धड़कने पर मजबूर कर देती.
बाकी समय में वे पूरी शालीनता से खुद को ढकी रहती थीं.
जब वे मेरे सामने चलतीं और मैं उनकी हर अदा को मंत्रमुग्ध होकर निहारता.
तो तब उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तैर जाती, जैसे उन्हें मेरी बेचैनी का मजा आता हो.
उनके संस्कारी और सभ्य परिवार की पृष्ठभूमि को देखकर मैं हैरान था कि वे इतनी बिंदास कैसे हो सकती हैं.
मैं अपनी बात करूँ तो मैं घर में ज्यादातर सिर्फ बॉक्सर में ही रहता, वह भी बिना किसी अंडरवियर के.
मेरा बॉक्सर न ज्यादा लंबा था, न ज्यादा टाइट … बस इतना ढीला कि मेरे शरीर को खुली हवा का आनन्द मिले.
यह मेरी अपनी आदत थी, जिसे मैं बखूबी जीता था.
भाभी के संस्कारी परिवार की वजह से शुरू में मैं उनके साथ कोई शरारत या मजाक करने से हिचकता था.
लेकिन भाभी ने मुझे पूरी छूट दी थी कि मैं उनके साथ एक देवर की तरह शैतानी करूँ, उनकी खिंचाई करूँ.
जब वे मेरे साथ हंसती-खिलखिलातीं, तो मैं उन्हें पूरी आजादी दे देता.
पर मेरे मन में कभी हिम्मत न हुई कि मैं उन्हें छेड़ूँ.
उनकी मुस्कान में इतनी मासूमियत और शरारत थी कि मैं बस पिघल जाता.
उनके रसीले होंठों को देखकर मन करता कि बस उसी पल उन्हें अपने करीब खींच लूँ और उनकी हर सांस को महसूस करूँ.
वक्त बीतता गया और भाभी मेरे साथ और ज्यादा घुल-मिल गईं.
हमारा रिश्ता हंसी-मजाक और हल्की-फुल्की बातों से और गहरा हो गया.
वे मेरे खाने-पीने का पूरा ध्यान रखतीं और शरारत भरे लहजे में कहतीं- अच्छे से नहीं खाओगे, तो ये सुडौल शरीर कैसे बनाए रखोगे, देवर जी?
यह कहकर वे एक चुलबुली मुस्कान बिखेर देतीं और अपनी आंखों से मेरी आंखों में कुछ कह जातीं.
जिसे मैं समझने की कोशिश में खो जाता.
बात गर्मियों के उन तपते दिनों की है जब मैं बाहर से खेलकर पसीने से तरबतर लौटा.
मैंने कपड़े बदले और सिर्फ बॉक्सर पहनकर रसोई में पानी पीने चला गया.
भाभी चूल्हे के पास नीचे बैठकर रोटियां सेंक रही थीं.
उनकी साड़ी का पल्लू हल्का सा सरका हुआ था और उनकी चूचियों की वह दूधिया झलक मेरे दिल को बेकाबू कर रही थी.
मैं खड़ा होकर पानी पी रहा था और मेरी नजरें बार-बार उनकी ओर चली जाती थीं.
पानी पीने के बाद जब मैं जाने लगा तो भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया.
उनकी उंगलियों का स्पर्श ऐसा था, मानो बिजली सी दौड़ गई हो.
उन्होंने मुझे अपने पास बिठा लिया, इतने करीब कि उनकी सांसों की गर्मी मेरे चेहरे को छू रही थी.
मैंने उनकी तरफ देखा तो वे बोलीं- यहीं बैठ कर खाना खा लो.
मैंने हां में मुंडी हिला दी और उनके चूचों को देखने लगा.
वे भी मेरी नजरों को भांप गई थीं लेकिन उन्होंने अपनी दूध घाटी को नहीं ढका.
फिर खाना परोसते वक्त उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी और उनकी मुस्कान में वह शरारत थी, जो मेरे दिल को और बेचैन कर रही थी.
भाभी थाली को सजा कर मेरी तरफ सरकाती हुई बोलीं- अच्छे से खाना, इसे और भी सुडौल बनाना है!
यह कह कर वे गहरी सी मुस्कान देने लगीं.
उनकी इस बात का मुझे कुछ मतलब समझ में नहीं आया कि भाभी ऐसा क्यों कह रही हैं.
जैसे ही मेरा ध्यान निवाला लेने के लिए नीचे गया तो देखा कि मेरा लंड बाक्सर से बाहर निकला हुआ है.
मैंने तुरंत भाभी की तरफ देखा तो वे जोर जोर से हंसने लगीं और बोलीं- शैतान हो गया है मेरा बदमाश देवर!
हड़बड़ी में मैंने एक हाथ अपने लंड पर रखा और दूसरे हाथ से खाना खा रहा था तो वह सना हुआ था.
भाभी के बिल्कुल नजदीक होने के कारण उनके मादक जिस्म के सुगंध से मैं पागल हो रहा था.
शायद भाभी को भी कोई आपत्ति नहीं थी.
उनकी भी एक आंख चूल्हे पर तो दूसरी मेरे लंड पर थी.
इस दिन के बाद से तो भाभी मेरे साथ पहले से ज्यादा घुल-मिल गईं.
जब कभी भी मेरे बगल में सोफा या बेड पर बैठतीं तो उनके हाथ मेरी जांघों पर लंड के नज़दीक ही होते थे … जो बातों बातों में उसे छू भी लेते थे.
वे जब भी मेरे साथ बात या मजाक करतीं तो उनके रसभरे होंठों पर एक मस्ती भरी मुस्कान होती जो उनके चेहरे को और भी निखार देती थी.
हम दोनों जब भी अकेले होते तो लगभग अधनंगे ही रहते थे.
उनका साड़ी पहनने का तरीका और मेरा बॉक्सर को अस्त व्यस्त रखना एक दूसरे को आँखों से चोदने का सुख देने लगते.
उन्हें जब भी मौका मिलता तो वे मेरे सीने पर उभरी हुई मेरी घुंडी को अपनी दो उंगलियों में पकड़ कर मींजती हुई उसकी चिमटी ले लेतीं और मेरे मुँह से दर्द भरी आह को सुनकर जोर जोर से हंसने लगती थीं.
इतना सब होने के बाद भी मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई कि मैं भी अपनी भाभी के साथ ऐसा कुछ कर सकूँ!
गांव में होली खेलने का मजा कुछ अलग ही होता है.
उस वक्त फागुन की मस्ती और बसंती मादक हवाएं नवजवान दिलों में एक मस्ती भर देती थीं.
उस दिन होली की मस्ती सभी को चढ़ी थी.
कुछ देर तक भैया ने भाभी के साथ होली खेली और बाहर दोस्तों से मिलने चले गए.
माँ और पिताजी पड़ोस में होली खेल रहे थे और पिताजी को भांग पिला दी थी, जिस वजह से माँ को उन्हें संभालने में दिक्कत हो रही थी.
होली खेलने के बाद मैं घर आया और पता चला कि भाभी घर में बिल्कुल अकेली हैं और सोफे पर बैठी टीवी देख रही हैं.
जैसे ही मैं उन्हें रंग लगाने के लिए आगे बढ़ा तो वे भागती हुई बेडरूम में चली गईं.
मैं भी उनके पीछे पीछे भागा लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ.
कुछ देर बाद अपने बेडरूम में आराम करने के बाद मैं छत पर चला गया.
मैं नहाने के लिए गया और पानी की टंकी वाले नल के नीचे बैठ गया.
जब साबुन के लिए हाथ बढ़ाया तो पाया की वहां साबुन नहीं है.
मैं पीछे मुड़ा तो देखा कि भाभी के हाथ में था.
भाभी ने कहा- मैं नहलाऊंगी!
मैंने कहा- मैं थक गया हूं भाभी और मजाक में मूड में तो बिल्कुल भी नहीं हूं!
भाभी ने कहा- थक गए हो इसी लिए तो सोचा कि तुम्हारी मदद कर दूं और अब चुपचाप बैठ जाओ.
मैं एक छोटे बच्चे की तरह बैठ गया और भाभी मेरे सर और पीठ पर साबुन मलने लगीं.
बाद में भाभी ने मुझे खड़े होने के लिए कहा.
मैंने कहा- बाकी का मैं खुद कर लूंगा.
लेकिन भाभी ने नहीं सुनी और मैं खड़ा हो गया.
भाभी के छूने के कारण मेरा लंड लोहे की तरह खड़ा हो गया था.
जिसे देख भाभी के चेहरे पर मस्ती भरी मुस्कान छा गई.
उन्होंने मेरी छाती पर साबुन मलते हुए कहा- अब बस या कहीं और भी साबुन लगाना है?
मैंने कहा- मैं कर लूंगा आप रहने दो.
लेकिन भाभी ने मेरी बात अनसुनी कर दी.
मैं खड़ा हो गया और उनके नाजुक हाथों का स्पर्श मेरे शरीर को और बेकाबू कर रहा था.
मेरा लंड अब लोहे की तरह तन चुका था.
जिसे देखकर भाभी के चेहरे पर वह मस्ती भरी मुस्कान और गहरी हो गई.
मेरी छाती पर साबुन मलते हुए उन्होंने शरारत भरे लहजे में वापस पूछा- बस, अब और कहीं साबुन लगाना है देवर जी?
मैंने झेंपते हुए कहा- भाभी, मैं कर लूँगा, आप रहने दें.
लेकिन उनकी आंखों में वह चमक थी जो मुझे बता रही थी कि यह पल इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाला.
‘ठीक है!’ कहकर भाभी ने साबुन नीचे रखने का बहाना बनाया और एक पल में ही मेरे बॉक्सर को खींच लिया.
अगले ही पल मैं उनके सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था, मेरा तना हुआ लंड उनकी आंखों के सामने था.
लाचारी में मैंने दोनों हाथों से लौड़े को छिपाने की कोशिश की लेकिन मेरी बेचैनी देख भाभी की हंसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी.
उनकी खिलखिलाहट में एक शरारती मासूमियत थी.
अचानक उन्होंने मग में पानी भरा और मेरे लंड पर जोर से मारा.
फिर चुलबुले अंदाज में बोलीं- बुरा न मानो देवर जी, होली है!
उनकी आंखों में वह शरारत थी, जो मेरे दिल को और बेकरार कर रही थी.
मैं बिल्कुल असहाय-सा खड़ा था.
मग को वापस बाल्टी में फेंकते हुए भाभी ने कहा- अब तुम नहा लो, मैं खाने का इंतजाम करती हूँ.
जाते-जाते उन्होंने मेरे लंड पर रखे मेरे हाथों को जोर से चिमटी काटी और उनकी हंसी की गूँज के साथ वे नीचे किचन में चली गईं.
होली की मस्ती और थकान के बाद भाभी की इस शरारत से मैं थोड़ा खीझ भी गया था.
नहाकर मैं अपने बेडरूम में आया और थकान ऐसी थी कि कब नींद ने मुझे अपनी आगोश में ले लिया, पता ही नहीं चला.
लगभग एक घंटे बाद भाभी मेरे कमरे में आईं.
मेरा टॉवल खिसक चुका था और मैं पूरी तरह नंगा था.
भाभी की छत वाली हरकत की वजह से नींद में भी मेरा लंड तनाव में था.
भाभी ने मुझे पहली बार इस तरह देखा. उनकी नजरों में एक गहरा सुकून और स्नेह था, जैसे वह अपने लाड़ले देवर को प्यार भरी नजरों से जी भरकर निहार रही हों.
उनकी आंखों में वह चमक थी, जो बिना शब्दों के बहुत कुछ कह रही थी.
काफी देर तक मुझे प्यार और शरारत भरी नजरों से देखने के बाद, भाभी धीरे से मेरे पास झुकीं, जैसे कोई प्रियजन अपने सबसे करीबी को जगाने के लिए झुकता है.
उन्होंने मुझे हल्के से उठाया और नर्म स्वर में कहा- उठो देवर जी, खाना तैयार है.
लेकिन जाते-जाते उन्होंने मेरे तने हुए लंड के सुपाड़े को हल्का-सा दबोच लिया.
उस स्पर्श से मैं एकदम से जाग उठा, जैसे बिजली-सी दौड़ गई हो.
मैंने जल्दी से वही टॉवल लपेटा और सीधे किचन में चला गया.
भाभी चूल्हे पर खाना गर्म कर रही थीं, उनकी साड़ी रंगों से सनी थी और कमर से नीचे बँधी साड़ी उनकी देह की हर वक्र को और उभार रही थी.
मैं दबे पांव उनके पीछे गया और शरारत में उनकी गोल-मटोल नितंबों को पकड़कर जोर से भींच दिया.
भाभी की चीख निकल गई, लेकिन वह अपनी जगह से जरा भी नहीं हिलीं, न ही मुझसे छूटने की कोशिश की.
मैं खड़ा हुआ और हंसते हुए बोला- बुरा न मानो भाभी, होली है!
लेकिन उनकी आंखों में ऐसे भाव थे मानो संतुष्टि और समर्पण का एक अनकहा मिश्रण हो, जो मेरी समझ से परे था.
घर में सिर्फ हम दोनों ही थे और उस पल में मानो दुनिया रुक सी गई थी.
मैं जमीन पर बैठ गया और भाभी खाना परोसने लगीं.
अब टॉवल हो या न हो, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता था.
भाभी मेरे सामने नीचे बैठीं और मेरे लंड को देखती हुई बोलीं- हाय, कितनी गर्मी है!
उन्होंने ‘गर्मी’ शब्द पर कुछ ज्यादा ही जोर दिया और उनकी आंखों में वह शरारत थी जो दोहरे मतलब को साफ बयान कर रही थी.
फिर वे अपने पल्लू से पंखा झलने लगीं, जिससे उनकी साड़ी हल्की-सी सरक गई.
मैंने गौर किया कि उनका ब्लाउज का गला आज कुछ ज्यादा ही गहरा था, जिससे उनकी छाती की गहरी खाई साफ दिख रही थी.
भाभी ने अन्दर कोई ब्रा नहीं पहनी थी और जब मेरी नजर उनकी जांघों पर गई, तो पाया कि पेटीकोट भी गायब था.
मैं बिल्कुल नंगा था और वे भी अपनी साड़ी के नीचे उतनी ही आजाद थीं.
दोस्तो, आज मैं अपनी भाभी को चोदने की नजर से देख रहा था और डर भी रहा था कि कहीं कुछ उल्टा न हो जाए.
खाना खत्म करके जब मैं उठा, तो टॉवल फिर से खुल गया और मैं एक बार फिर उनके सामने नंगा था.
मेरा लंड उनके चेहरे के ठीक सामने था और भाभी की आंखों में एक खुशी की चमक थी.
वे मुस्कुराईं और उनकी वह मुस्कान मेरे दिल को गुदगुदा गई.
मैंने टॉवल फिर से लपेटा और हॉल में चला गया.
कुछ देर बाद भाभी भी वहां आ गईं.
उनकी साड़ी अब इतनी ढीली थी कि वह उनके जिस्म पर बस नाममात्र को टिकी थी, ठीक वैसे ही जैसे मेरा टॉवल मेरे कमर पर.
मैं मोबाइल चेक कर रहा था.
तभी भाभी पीछे से आईं और मेरे टॉवल को एक झटके में खींच लिया.
मुझे फिर से नंगा देखकर वह बोलीं- अब मैं भी बदला लूँगी देवर जी!
घर में सिर्फ हम दोनों थे और भाभी की मस्ती अपने चरम पर थी.
मैं चुपचाप खड़ा रहा, उनकी हरकतों को देखता हुआ.
अचानक भाभी अपने घुटनों पर बैठ गईं और मेरे नितंबों को जोर से काट लिया.
उनके दांत मेरे जिस्म में गड़ गए और उस दर्द में भी एक अजीब-सा आनन्द था.
उनकी शरारत भरी आंखें मेरी ओर ताक रही थीं, जैसे वह कह रही हों कि यह होली की मस्ती अभी खत्म नहीं हुई.
भाभी ने मेरी त्वचा को अपनी उंगलियों से इस तरह सहलाया कि मेरे रोंगटे खड़े हो गए.
फिर उन्होंने मुझे धीरे से अपनी ओर खींचा और मेरी नजरें उनकी गहरी आंखों से टकराईं.
मेरे सामने अब उनकी वही मासूम लेकिन रहस्यमयी मुस्कान थी, जो हर बार मेरे दिल को छू लेती थी.
उनकी आंखों में एक अनकहा प्यार चमक रहा था जैसे सितारों भरी रात का आकाश मेरे लिए झिलमिलाने लगा हो.
उस पल में मैंने पहली बार उनके दिल की गहराई में अपने लिए वह अनमोल अहसास देखा, जो शब्दों से परे था.
जब भाभी ने मेरी ओर एक कदम बढ़ाया, तो मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गईं.
मैंने उन्हें प्यार से रोका और धीमी आवाज में कहा- भाभी बस … अब और नहीं!
मेरी बात सुनकर उनके चेहरे पर एक चंचल नाराजगी उभरी.
उन्होंने हल्के से मेरी कमर पर एक शरारती थपकी दी, जिससे मेरी त्वचा पर एक गर्माहट सी दौड़ गई.
उनकी इस अदा को देखकर मेरी हिम्मत जवाब दे गई और मैं खामोश होकर उनके सामने समर्पण कर बैठा.
फिर भाभी ने घुटनों पर बैठी अवस्था में ही अपनी नजरें मेरी आंखों में गड़ाते हुए धीरे-धीरे मेरे लंड को अपनी जीभ के कोमल स्पर्श से नवाजना शुरू किया.
उनकी उंगलियां मेरे घुटनों से लेकर मेरी जांघों तक इस तरह फिसलीं, जैसे कोई रेशमी धागा मेरे तन को लपेट रहा हो.
हर स्पर्श में एक तीव्र, लेकिन मीठा अहसास था, जो मेरे मन को किसी और ही दुनिया में ले जा रहा था.
जब उनकी गर्म सांसें मेरे लंड पर पड़ीं, तो मेरे दिल ने जैसे एक नया संगीत छेड़ दिया.
उन्होंने मेरी ओर देखा, उनकी आंखों में एक चमक थी जैसे वे मुझसे कुछ पूछना चाहती हों.
‘कैसा लग रहा है?’
उनकी आवाज में शहद-सी मिठास थी.
मेरे तो होश ही उड़ गए थे.
उनके इस जादुई स्पर्श के सामने मैंने अपने आपको पूरी तरह उनके हवाले कर दिया.
जो हुआ उसके बाद, वह पल मेरे जीवन में हमेशा के लिए अमिट हो गया.
भाभी ने मेरे लंड को अपने कोमल होंठों से इस तरह छुआ, जैसे कोई फूल की पंखुड़ियों को प्यार से सहला रहा हो.
उनकी हर हरकत में एक गहरा जादू था, जो मेरे मन को किसी स्वप्नलोक में ले जा रहा था.
अगले पल ही उनके होंठ मेरे लौड़े पर इस तरह रेंग रहे थे, जैसे कोई नदी किनारों को चूमती हुई बह रही हो.
हर चुम्बन में एक गहरा अहसास था, जो मेरे दिल को और करीब ला रहा था.
मेरे पैरों में अब इतनी ताकत नहीं बची थी कि मैं स्थिर खड़ा रह सकूँ.
मैंने कई बार अपने मन को टटोला था.
लेकिन किसी के स्पर्श का ये अनुभव मेरे लिए बिल्कुल नया था.
जब भाभी ने मेरे लंड को अपने गले तक भरा, तो मेरे मन में एक तूफान सा उठने लगा.
मैं धीरे-धीरे दीवार का सहारा लेने लगा.
लेकिन भाभी ने फिर से मेरी कमर पर एक चंचल थपकी दी, जैसे कह रही हों कि ‘भागते किधर हो देवर जी, अभी तो शुरुआत है.’
यह मेरे जीवन का पहला ऐसा अनुभव था, जहां मैंने किसी के स्पर्श में इतना गहरा सुकून और उत्तेजना एक साथ महसूस की.
भाभी ने मेरे लंड को अपने होंठों और उंगलियों से इस तरह नवाजा, जैसे कोई चित्रकार अपनी कूँची से कैनवास पर रंग भर रहा हो.
उनकी हर हरकत में एक लय थी, एक संगीत था, जो मेरे मन को झंकृत कर रहा था.
उन्होंने मेरे लंड के हर हिस्से को इतने प्यार से चूसा कि मैं खुद को भूलने लगा.
उनके होंठों का हर स्पर्श मेरे लिए एक नई कहानी बुन रहा था.
कभी वह धीरे से मेरे लंड को चूमतीं तो कभी उनकी उंगलियां मेरे लौड़े पर नाचने लगतीं.
हर बार जब उनकी सांसें मेरे लंड की टट्टों पर आतीं, तो मेरे दिल की धड़कनें और तेज हो जाती थीं.
इस पल में मैंने जाना कि सच्चा आनन्द क्या होता है.
भाभी के हर स्पर्श में एक जादू था जो मुझे मेरे ही शरीर से परिचित करा रहा था.
अगले कुछ पलों में मैं उनके सामने पूरी तरह निढाल हो चुका था.
लेकिन उनके चेहरे पर वही मासूम मुस्कान थी जो मुझे बार-बार उनकी ओर खींच रही थी.
यह अनुभव मेरे लिए न केवल शारीरिक था बल्कि मेरे मन और आत्मा को भी छू गया था.
मैं जानता हूँ कि ये पल मेरे जीवन में हमेशा के लिए एक अनमोल खजाना बनकर रहेंगे.
भाभी ने मेरे लंड को अपनी गर्म उंगलियों से इस तरह सहलाया कि मेरी सांसें थम सी गईं.
उनकी हर छुअन में एक नशीली मिठास थी जो मेरे तन-मन को किसी जादू में बाँध रही थी.
फिर उन्होंने मुझे धीरे से अपनी ओर खींचा और मेरी नजरें उनकी गहरी, चमकती आंखों में खो गईं.
उनके होंठों पर वही चंचल, रहस्यमयी मुस्कान थी जो मेरे दिल को हर बार बेकरार कर देती थी.
उनकी आंखों में एक अनमोल प्यार झलक रहा था जैसे सागर की गहराइयों में कोई मोती मेरे लिए चमक रहा हो.
उस पल मैंने उनके दिल में मेरे लिए वह अनकहा जज़्बा देखा जो मेरे लिए बिल्कुल नया था.
जब भाभी ने खड़ी होकर अपनी चुत को मेरे लंड की ओर बढ़ाया तो मेरे दिल की धड़कनें जैसे कोई तूफानी संगीत बन गईं.
मैंने प्यार और हिचक के साथ उन्हें रोका और धीमी, काँपती आवाज में कहा- भाभी, अब बस … इससे आगे नहीं!
मेरी बात सुनकर उनके चेहरे पर एक शरारती नाराजगी उभरी.
उन्होंने मेरी कमर पर एक चंचल, लेकिन गर्म थपकी दी, जिससे मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ गई.
उनकी इस अदा ने मेरी सारी हिम्मत छीन ली और मैं चुपचाप उनके सामने समर्पण कर बैठा.
फिर भाभी ने अपनी नजरें मेरी आंखों में डुबोते हुए मेरे लंड को अपनी कोमल चुत के स्पर्श से नवाजना शुरू किया.
उनकी उंगलियां मेरे घुटनों से लेकर मेरी जांघों तक इस तरह फिसलीं, जैसे कोई रेशमी रुमाल मेरे तन को लिपट रहा हो.
हर स्पर्श में एक तीव्र लेकिन रसीला अहसास था जो मेरे मन को किसी और ही आलम में ले जा रहा था.
जब भाभी ने मेरे पैरों में वह हल्का-सा कंपन महसूस किया तो उनकी आंखों में एक शरारती चमक उभर आई.
उनकी सांसें मेरे तन को और गर्म कर रही थीं जैसे कोई लावा मेरे शरीर पर रेंग रहा हो.
वे वापस से घुटनों पर आ गईं और धीमे लेकिन गहरे जुनून के साथ मेरे सबसे संवेदनशील हिस्से को यानि मेरे लंड के टट्टों अपने रसीले होंठों से चूम रही थीं.
हर चुंबन में एक तीव्र नशा था जो मेरे तन-मन को किसी और ही दुनिया में ले जा रहा था.
उस पल मैं पूरी तरह उनके हवाले था.
मेरा मन, मेरा तन, सब कुछ उनकी गर्मी में पिघल रहा था.
मैंने अपने दोनों हाथ उनकी मुलायम ज़ुल्फ़ों में डाल दिए उनके सिर को प्यार से सहलाते हुए.
फिर एक अनकही आग ने मुझे जकड़ लिया.
मेरे लंड से वापस से ज्वालामुखी फट पड़ा और मैं उनके होंठों की गर्मी में पूरी तरह डूब गया.
मेरी सांसें तेज़ हो गईं और मैं उस चरम सुख की लहर में बहने लगा, जो मेरे पूरे वजूद को झकझोर रही थी.
भाभी ने मेरे लंड को अपनी मजबूत पकड़ में जकड़ रखा था, जैसे वह मेरे हर जज़्बात को अपने में समेट लेना चाहती हों.
उनकी उंगलियां मेरी कमर में गहरे धँस रही थीं, जैसे वह कह रही हों- मुझे सब कुछ दे दे, मेरे राजा.
वह पल इतना तीव्र था कि मुझे समय का कोई अहसास नहीं रहा.
मैं बस उनकी गर्मी, उनकी पकड़ और उनके होंठों के जादू में खोया हुआ था.
भाभी ने मेरे लंड रस को अपने मुँह में ऐसे समा लिया, जैसे कोई प्यासी धरती बारिश की हर बूँद को पी लेती है.
जब वह लहर थमी, तो मैं निढाल होकर ज़मीन पर सरक गया.
मेरी आंखें आधी खुली थीं और मैं उन्हें देख रहा था.
भाभी के चेहरे पर वही चंचल लेकिन नशीली मुस्कान थी जो मेरे दिल को फिर से बेकरार कर रही थी.
उनकी आंखों में मेरे सुख को देखकर एक गहरा आनन्द चमक रहा था जैसे वे मेरे हर जज़्बात की गवाह बनकर पिघल रही हों.
उन्होंने मुझे प्यार से सहारा देकर उठाया और जब उनकी नजरें मेरी नजरों से टकराईं तो मैंने देखा कि उनकी आंखों में एक जादुई चमक थी.
उन्होंने धीरे से अपने होंठ खोले और मेरे मुरझाए लौड़े को अपने मुँह में मरे हुए मेंढक की तरह भर लिया.
आह … मैंने महसूस किया कि मैंने पहले कभी इतना गहरा, इतना तीव्र अनुभव नहीं किया था.
वह पल मेरे लिए किसी स्वर्ग के सुख से कम नहीं था.
भाभी ने मेरे लौड़े को अपने होंठों में दबा लिया था और मुसकुराती हुई वे लंड को होंठों से मसल रही थीं.
मेरे लंड में जान आने लगी थी तो उनकी वह मुस्कान मेरे लिए दुनिया की सबसे कीमती चीज़ बन गई.
मैंने बिना कुछ सोचे लंड को खींचा और उनके होंठों को अपने होंठों से छू लिया.
उनके होंठों का स्वाद मेरे लिए किसी मादक शराब से कम नहीं था.
उनके होंठों में और मुँह में मेरे ही लंड रस की गर्मी का स्वाद था जो उनके स्पर्श से और तीव्र हो गई थी.
मैं उनके होंठों को चूमता रहा और उस पल में मेरी आंखों से आंसू छलक आए.
ये आंसू मेरे चरम आनन्द के थे, मेरे पुरुषत्व की आग के थे और भाभी ने मेरे इस भाव को तुरंत समझ लिया.
मेरे दोनों हाथ उनके गालों पर थे और मैं उनके होंठों को इस तरह चूस रहा था जैसे वे मेरे लिए जीवन का अमृत हों.
भाभी भी मेरे बालों को प्यार से सहला रही थीं जैसे वह मेरे हर जज़्बात को अपने दिल में बुन रही हों.
मैं उनके होंठों को देर तक चूमता रहा, हर पल को जीता रहा.
तभी, भाभी ने शरारत से मेरे सीने को हल्के से चिकोट लिया.
मैं एकदम से होश में आया और उनकी ओर देखने लगा.
उनके चेहरे पर एक नया जोश चमक रहा था जैसे वह मेरे हर भाव को अपने में समा लेना चाहती हों.
मैंने महसूस किया कि मैं पूरी तरह नग्न था जबकि भाभी अपने दो कपड़ों में उतनी ही मादक और रहस्यमयी लग रही थीं.
मेरे मन में एक हल्की-सी शर्म जागी और मैं पीछे सरकने लगा.
लेकिन भाभी मेरे साथ-साथ खिसक आईं, उनकी आंखों में एक ज्वाला-सी जल रही थी.
शर्म से मेरा सिर झुक गया.
लेकिन भाभी ने प्यार से मेरा चेहरा उठाया … उन्होंने मेरे निचले होंठ को हल्के से काट लिया और उनकी वह हरकत मेरे शरीर में फिर से आग जगा गई.
उनकी वह हरकत मानो कह रही थी कि ‘मेरे सामने शर्माने की कोई ज़रूरत नहीं, मेरे कामुक देवर.’
उनकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर बिखर रही थीं और मैं फिर से उनके न/शे में डूबने लगा.
पहली बार उनकी आवाज़ मेरे कानों में गूँजी.
इतनी मादक, इतनी रसीली कि मेरा दिल पिघल गया ‘तेरी भाभी अपने देवर से बेपनाह प्यार चाहती है. क्या तू मुझे वह प्यार देगा?’
उनकी इस विनम्रता और उनके मादक निमंत्रण ने मेरे पूरे वजूद को हिला दिया.
मैंने शर्माते हुए, लेकिन दिल की गहराइयों से कहा- भाभी, मैं तो कब से आपके इस हुस्न की आग में जल रहा हूँ. बस, ये डर था कि आपके सामने अपने जज़्बात कैसे उड़ेलूँ.
मेरी बात सुनकर भाभी के गाल लाल गुलाब की तरह चमक उठे जैसे सूरज की पहली किरण किसी फूल को चूम ले.
उनकी वह शर्म मुझे और करीब खींच रही थी.
मैंने फिर से उनके होंठों को चूमा, इस बार और गहराई से और गर्मी से.
मेरे हाथ उनके बाजुओं को थामे हुए थे और हम दोनों धीरे-धीरे उठने लगे.
मैं उनके होंठों को इस तरह चूस रहा था, जैसे उनके होंठों में मेरे लिए दुनिया का सबसे मादक रस भरा हो.
भाभी ने अपनी जीभ मेरे होंठों पर फेरी और उस पल में हम एक-दूसरे की गर्मी में पूरी तरह पिघल गए.
मेरे हाथ उनकी कमर से होते हुए उनके कूल्हों तक चले गए.
वह हिस्सा जो मेरे लिए उनके हुस्न का सबसे नशीला गहना था.
भाभी ने भी मेरी कमर को वहीं सहलाना शुरू किया जहां उनकी थपकी ने मुझे पहले आग में झोंक दिया था.
हमारी जीभ एक-दूसरे को चूम रही थी और भाभी की सांसों का गर्म रस मेरे होंठों पर बिखर रहा था.
मैं उस रस को चख रहा था जैसे कोई भटका मुसाफिर मरुभूमि में किसी झरने का पानी पी रहा हो.
उनकी सांसें, उनकी गर्मी और उनका जुनून मेरे तन-मन को फिर से जगा रहा था.
कुछ देर बाद, जब हमारी नजरें फिर से मिलीं तो भाभी ने शर्माते हुए अपने चेहरे को मेरे सीने में छुपा लिया.
उनकी वह शर्म, उनकी वह गर्मी और उनका वह जुनून मुझे किसी जन्नत की सैर करा रहा था.
मैंने उनकी आंखों में झांकते हुए, एक शरारती मुस्कान के साथ पूछा- अब काहे की शर्म मेरी जान?
भाभी ने जवाब में कुछ नहीं कहा, बस उनकी आंखों में एक मादक चमक उभर आई.
उन्होंने मेरे सीने को अपनी नर्म उंगलियों से सहलाया और मेरे एक निप्पल को हल्के से कुरेद दिया.
उनकी वह छुअन मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ा गई और मेरे रोंगटे खड़े हो गए.
उनकी हर हरकत में एक जादू था, जो मुझे और बेकरार कर रहा था.
मैंने उनकी ओर देखा और धीमे लेकिन गहरे स्वर में कहा- भाभी, दरवाजा बंद कर दो. आज कोई नहीं आएगा हमारे बीच!
उनकी आंखों में एक चंचल शर्म झलकी.
लेकिन वे उठीं और दरवाजे की सिटकनी चढ़ा आईं.
दोस्तो, एक लंबे प्रेम के वातावरण के बाद अब चुदाई की बेला आ गई थी.
मैंने बिना एक पल गँवाए उन्हें अपनी बांहों में उठा लिया.
उनका बदन मेरे सीने से टकरा रहा था और उनकी सांसों की गर्मी मेरे चेहरे पर बिखर रही थी.
मैं उन्हें गोद में लिए सीढ़ियों से ऊपर बेडरूम की ओर बढ़ चला.
उनकी साड़ी, जो पहले से ही ढीली थी, मेरे कंधों पर रेशम-सी फिसल रही थी.
जब मैंने उन्हें बेड पर उतारा तो साड़ी पूरी तरह खिसक गई और वह मेरे सामने सिर्फ़ अपने ब्लाउज़ में बैठी थीं.
उनका बदन किसी मखमली चाँदनी की तरह चमक रहा था और वह ब्लाउज़ उनके हुस्न को और रहस्यमयी बना रहा था.
मैंने उनकी ओर बढ़कर उस ब्लाउज़ को खोलने की कोशिश की लेकिन भाभी ने मेरे हाथ पर एक चंचल थपकी दी.
उनकी वह शरारत मेरे लंड को और भड़का गई.
मैंने हल्के से उन्हें धक्का दिया और वे बेड पर लेट गईं.
उनकी टांगें अभी भी बेड के किनारे लटक रही थीं और उनकी सांसें तेज़ हो रही थीं.
मैंने उनके घुटनों को प्यार से थामा और उनकी टांगों को धीरे-धीरे खोलने की कोशिश की.
लेकिन भाभी ने शरारत से अपनी टांगें फिर से बंद कर लीं.
उनकी आंखों में एक मादक चुनौती थी जैसे वह मुझे और तड़पाना चाहती हों.
मैंने उनकी ओर देखा और एक गहरी मुस्कान के साथ कहा- अब बदला लेने की बारी मेरी है, मेरी मलिका!
भाभी ने अपनी भौंहें उठाईं और उनकी आंखों में एक सवाल चमक उठा.
वह बिना बोले, अपनी नजरों से पूछ रही थीं- बता मेरे सैंया, तू करना क्या चाहता है?
उनकी वह अदा, उनकी वह गर्मी और उनकी वह चमक मेरे दिल को किसी आग में झोंक रही थी.
मैंने उनके करीब झुककर उनकी सांसों को अपने होंठों से छुआ.
उनका बदन मेरे स्पर्श से काँप उठा और उनकी आंखें आधी मुँद गईं.
मैंने उनके घुटनों को फिर से प्यार से सहलाया और इस बार उनकी टांगें धीरे-धीरे मेरे सामने खुलने लगीं.
उनका हर इशारा, उनकी हर हरकत मेरे लिए एक नया नशा बन रही थी.
मैंने उनकी ओर देखा.
मेरी नजरों में वह जुनून था जो उनके हुस्न की आग में और भड़क रहा था.
मैंने भाभी की कमर को अपनी मजबूत हथेलियों में जकड़ लिया.
उनकी कोमल त्वचा मेरे स्पर्श से जैसे थरथरा रही थी.
धीरे-धीरे मैंने उन्हें बिस्तर के किनारे तक खींच लिया जहां उनकी सांसों की गर्माहट हवा में तैर रही थी.
उनकी दोनों टांगों को प्यार से अलग करते हुए मैंने भाभी की चूत के दर्शन किए.
वह नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं था.
भाभी की चूत इतनी साफ और रेशमी थी, मानो मखमली गुलाब की पंखुड़ियां हों और मालपुआ की तरह फूली हुई, रस से सराबोर.
उनकी चुत का अगल-बगल का हिस्सा उनकी मादक चाशनी से पूरी तरह भीगा हुआ था जो मेरे दिल को और बेकरार कर रहा था.
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए धीमी, गहरी आवाज में कहा- भाभी, जिस तरह आपने अपने छोटे देवर (मेरे लंड) को इतना प्यार और तड़प दी, अब मैं भी आपकी इस रसीली, मालपुआ-सी चूत का हर स्वाद, हर रस को जी भरकर चखूँगा.
भाभी की होंठों पर एक शरारती मुस्कान तैर गई और उन्होंने मेरे बालों को हल्के से खींचा, जैसे मेरी बेकरारी को और भड़काना चाहती हों.
मैंने अपने दोनों हाथ उनके घुटनों पर रखे और अपनी जीभ को नुकीला करते हुए उनकी रेशमी जांघों पर फिसलने लगा. पहले मैंने उनकी जांघों को हल्के से काटा, फिर प्यार से चूमा और धीरे-धीरे उनकी चूत के करीब पहुंचा.
लेकिन मैंने अभी उसे छुआ नहीं, पहले मैंने अगल-बगल के रस को अपनी जीभ से चखा, उनकी जांघों को और भड़काते हुए और फिर दूसरी जांघ की ओर बढ़ गया, उनके घुटनों तक.
जब मेरी गर्म सांसें उनकी चूत के करीब थीं, भाभी ने अपनी कमर उठाकर मेरे मुँह को और करीब लाने की कोशिश की.
उनकी बेकरारी देख मैंने अपने हाथ उनकी गोल, मुलायम गांड पर रखे और उसे धीरे-धीरे गूँथने लगा, जैसे कोई मिट्टी को प्यार से संवारता हो.
इस बार मैंने उनकी जांघों को और धीमे और कामुक ढंग से चूमा, हल्के से दांतों से काटा और उनकी चूत की ओर बढ़ा.
भाभी के मुँह से एक मादक सीत्कार निकली, जो मेरे कानों में शहद-सी घुल गई.
उन्होंने अपने हाथ बिस्तर की चादर में गड़ा दिए और अपनी चूत को और ऊपर उठाने लगीं, जैसे मुझे पूरी तरह समर्पित करना चाहती हों.
उनकी सिसकियों भरी आवाज में एक तड़प थी जब उन्होंने कहा- अरे, कोई इस तरह तड़पाकर बदला लेता है क्या, मेरे राजा?
लेकिन मैंने उनकी बात अनसुनी कर दी और उनकी चूत को छोड़कर फिर से दूसरी जांघ पर लौट गया, उसे और प्यार से काटते हुए उनके घुटने तक पहुंच गया.
उनकी सांसें अब बेकाबू हो रही थीं और मैं उनकी हर थरथराहट को महसूस कर रहा था.
जब मैंने भाभी की ओर देखा, तो उनका पेट तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था, जैसे कोई लहरें उठ रही हों.
उनकी सांसें फूली हुई थीं और उनके निप्पल इतने सख्त हो गए थे कि वह चोली के पार चमक रहे थे, मानो मेरे लिए इशारा कर रहे हों.
मैंने अपने बाएं हाथ से उनकी चूत की गुलाबी पंखुड़ियों को धीरे से खोला और देखा कि वह पूरी तरह चाशनी में डूबी हुई थी जैसे कोई मधुर मिठाई मेरे लिए तैयार हो.
मैंने एक उंगली धीरे से अन्दर सरकाई और उनकी चूत के दाने को हल्के से चूमा.
उस एक स्पर्श से भाभी के पूरे शरीर में जैसे बिजली दौड़ गई. उन्होंने अपनी गांड को करीब डेढ़ फीट ऊपर उठाया, मेरी उंगली को अपनी चूत में जकड़ लिया.
वे एक ऐसी रोमांचक, मादक आवाज में सिसकियां लेने लगीं- माँ … आह … आह … आह!
उनकी यह आह आह मेरे दिल को पागल कर रही थी.
मैं निरंतर भाभी की चुत से खेलता चला गया.
कुछ ही पलों में उनकी चूत से एक गर्म धार निकली, जिसका स्वाद मेरी जीभ पर आज भी वैसा ही ताजा है, जैसे पहली बार चखा हो.
झड़ने के बाद उनकी गांड बिस्तर पर गिरी लेकिन उनका शरीर अभी भी काँप रहा था खासकर उनकी जांघें, जो थरथराती रहीं.
ऐसा लग रहा था जैसे उनकी आत्मा को कोई आनन्दमय दुनिया में ले जाकर वापस लाया हो.
मैंने धीरे-धीरे उनकी चूत के रस का स्वाद लेना जारी रखा, उनके होश में आने का इंतजार करते हुए जीभ को चुत से लड़ाता रहा.
जब उनके नाजुक हाथ मेरे बालों को सहलाने लगे, तब मुझे पता चला कि भाभी वापस मेरे साथ हैं.
उनकी आंखों में आंसुओं की चमक थी जो शायद उस अतुलनीय सुख की गवाही दे रही थी.
मैंने मुस्कुराते हुए पूछा- कैसा लगा भाभी, अपने लाड़ले देवर का यह प्यारा-सा बदला?
भाभी ने उठने की कोशिश की लेकिन उनकी जांघों में अभी भी वह कमजोरी थी, जो मेरे स्पर्श ने दी थी.
उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और मैं उनके ऊपर लेट गया.
मेरे बालों को सहलाते हुए भाभी ने धीमी, भावुक आवाज में कहा- तूने ये क्या कर दिया मेरे राजा? ऐसा यौन सुख … ऐसी तृप्ति तो मुझे तेरे भैया से भी कभी नहीं मिली. पहली बार मेरी चूत से इतना रस निकला है और मेरी टांगों में तो जैसे जान ही नहीं बची!
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए कहा- भाभी, यही तो फर्क है पति और देवर में! पति तो बस अपनी जरूरत पूरी करता है, लेकिन एक देवर अपनी भाभी को, अपनी दोस्त को वह हर सुख देना चाहता है, जिसकी वह असली हकदार है … और मैं तो बस आपकी हर ख्वाहिश को सच करना चाहता हूँ.
जैसे ही ये बात उनके कानों में पड़ी, भाभी ने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे होंठों पर एक ऐसा चुम्बन जड़ा कि मेरी रूह तक कांप उठी.
उनके दांत मेरे होंठों को हल्के से खींच रहे थे, मानो वे मेरी सारी इच्छाओं को एक पल में जगा देना चाहती हों.
उस चुम्बन में एक तीव्र तृप्ति थी, जो मेरे दिल को धन्यवाद और वासना के मिश्रण से भर रही थी.
मैं उनके ऊपर लेटा हुआ था और देर तक उनके होंठों का ऐसे रसपान करता रहा, जैसे कोई प्यासा अमृत की बूंदों को तरस रहा हो.
बीच में जब मैंने उनके ब्लाउज के बटन छूने की हिम्मत की, भाभी ने मेरी कमर पर एक शरारती चपत जड़ दी.
मैंने उनकी आंखों में सवाल भरी नजरों से देखा, तो वे मुस्कुराईं और खुद ही अपने हाथों से ब्लाउज उतार फेंका.
उनके उजले, गोरे दूध मेरे सामने थे, जिन पर बादामी निप्पल इस तरह तने हुए थे जैसे कोई कामुक निमंत्रण दे रहे हों.
भाभी बिस्तर पर रानी की तरह बैठ गईं और अपने निप्पल मेरे सामने कर दिए, जैसे मुझे अपनी दुनिया में खींच रही हों.
मैं उनके बगल में बैठ गया और उनके दूध का स्वाद लेने लगा, जैसे कोई प्यास मजनू अपनी लैला के प्यार की भेंट चख रहा हो.
उधर भाभी ने मेरे लंड को अपने मुलायम हाथों से सहलाना शुरू कर दिया और मेरी उंगलियां उनकी चूत की नर्म गहराइयों को टटोलने लगीं.
उनकी हर सांस मेरे शरीर में आग लगा रही थी.
फिर भाभी ने मेरे लंड को अपने होंठों के बीच लिया और उसे इस तरह चूसा जैसे वह मेरी सारी मर्दानगी को अपने अन्दर समेट लेना चाहती हों.
उनके होंठ मेरी गोटियों पर भी प्यार बरसाने लगे और जब उन्होंने हल्के से मेरी एक गोटी को दांतों से छुआ, मेरी सांसें थम सी गईं.
मेरी हालत देखकर भाभी की हंसी छूट पड़ी और वे मेरे सुपाड़े को और जोश के साथ चूसने लगीं.
फिर हम दोनों बिस्तर पर एक-दूसरे में खो गए.
भाभी ने मेरा हाथ अपनी चूत पर रखा और धीमे से कहा- ये मेरे पति की अमानत है, जो मैं आज अपने देवर को सौंप रही हूं. वादा कर, जैसे तूने मेरे होंठों को तृप्त किया, वैसे ही इस लंड से मुझे स्वर्ग की सैर कराएगा.
उनकी बात सुनकर मैंने उनके पैर छुए और कहा- भाभी, मुझे ऐसा आशीर्वाद दें कि मैं आपको हर पल सुख की चरम सीमा तक ले जाऊं.
भाभी ने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा- यशस्वी भव! अब उतर जा इस रणभूमि में, मेरे वीर!
इतना कहते ही मैंने भाभी को बिस्तर पर हल्के से धकेला और उनकी चूत पर टूट पड़ा.
मेरी जीभ उनकी चुत की नर्म त्वचा को चूम रही थी और भाभी मेरे बालों को सहलाती हुई मुझे और करीब खींच रही थीं.
मैंने जवान हॉट भाभी की चूत के इर्द-गिर्द हल्के से काटा, उंगलियों से उनकी गहराइयों को छुआ और उनके दाने को चूसने लगा.
तभी उनकी चूत से पुनः रस का झरना फूट पड़ा, जो मेरे चेहरे को भिगो रहा था.
भाभी चरम सुख की लहरों में डूबने लगीं और सिसकारियां भरती हुई बोलीं- लगता है मेरे दूध ने तुझमें आग लगा दी है, जो इतने जोश से मेरे बदन को भोग रहा है … आह … उह … हम्म … आ … ह ..
यही सब कहती हुई वे पूरी तरह से झड़ गईं और उनका रस मेरे चेहरे पर मोतियों की तरह बिखर गया.
मैं गहरी सांसें लेते हुए उन्हें निहार रहा था. भाभी ने मुझे अपनी बांहों में खींचा और मेरे होंठों को चाटने लगीं.
मैंने हल्के से पूछा- अपने रस का स्वाद कैसा लगा भाभी?
वे शर्माईं और बोलीं- तेरे भैया से ये कभी न हुआ, जो तूने आज कर दिखाया.
इतना कहकर उन्होंने मेरे गाल पर प्यार से काट लिया.
मैं उनके ऊपर लेटा हुआ था और अपना लंड उनकी चूत में डालने की कोशिश कर रहा था.
भाभी ने अपनी टांगें पूरी खोल दीं मगर फिर भी छेद का रास्ता नहीं मिल रहा था.
तभी भाभी ने ठहाका लगाया और कहा- मुझे लगा तुझे औरत को तृप्त करना बखूबी आता है. इसीलिए तो मैंने तुझे ये अमानत सौंपी. लेकिन तू तो बुद्धू निकला, पगले!
मैंने हंसते हुए कहा- बस एक बार आपके आशीर्वाद से भीतर समा जाऊं, फिर देखिएगा भाभी.
भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और सुपाड़े को जोर से सहलाती हुई बोलीं- अच्छा? इतना घमंड? चूत चाटना और बात है और उसे कूटना और बात है … क्या तुझमें इतना दम है कि अपनी भाभी को सुख की मंजिल तक ले जाए?
इतना कहते ही उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत के मुहाने पर टिकाया और आंखों में देखकर कहा- अब घुसा दे अपना शस्त्र, मेरे वीर!
जैसे ही मेरे लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे भाभी की नर्म, गर्म गहराई में उतरने लगा.
उनकी आंखें एकदम सफेद हो उठीं, मानो सारी दुनिया एक पल को ठहर गई हो.
भाभी की सांसें रुक सी गईं और उनके होंठों से एक मादक सिसकारी छूटी जो मेरे रगों में आग सी दौड़ा गई.
मेरे शरीर में एक ऐसी कंपकंपी उठी जैसे बिजली का झटका हो.
दोस्तो, भाभी से मेरे लंड की मोटाई झेली नहीं जा रही थी.
ये मेरी ज़िंदगी का पहला मौका था, जब मेरा लंड किसी चूत की नमी और तपिश को महसूस कर रहा था.
और वह भी कोई साधारण चूत नहीं … वह चुत मेरी भाभी की रसीली, गीली और आग-सी जलती चूत थी जो हर धक्के के साथ मुझे अपने जादू में बाँध रही थी.
उनकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा लंड बिना किसी रुकावट के उसमें समाता चला गया मानो वह मेरे लिए ही बनी हो.
जैसे-जैसे लंड अन्दर सरकता गया, वैसे-वैसे भाभी का गर्म रस बाहर रिसने लगा.
उनकी चूत की नमी ने मेरे होश उड़ा दिए.
चूंकि उनकी चूत कसी हुई थी, लंड को पूरी तरह समाने में थोड़ा वक्त लगा.
हर इंच के साथ उनकी दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं, जैसे वह मुझे कभी छोड़ना ही न चाहती हों.
जब आखिरकार पूरा लंड अन्दर समा गया, तो हमने एक-दूसरे की आंखों में देखा.
उनकी आंखों में एक तड़प थी, एक आग थी जो बता रही थी कि हम दोनों यही पल चाहते थे.
यही आलम, यही जुनून, जो आज हमें नसीब हुआ था.
भाभी की चूत का स्पंदन मेरे लंड पर इस कदर महसूस हो रहा था जैसे वह मेरे साथ कोई गहरा राग छेड़ रही हों.
मैंने उनकी आंखों में देखकर पूछा- ये क्या जादू है?
भाभी ने एक शरारती मुस्कान के साथ कहा- मैंने तो तुझसे कहा था, तेरा भैया मुझे कभी इस तरह तृप्त नहीं कर पाया. लेकिन तू, मेरा प्यारा देवर, मेरी रूह तक को छू रहा है. आज पहली बार मैंने किसी मर्द के लंड को अपने मुँह और चूत में इस तरह महसूस किया है. तेरा लंड … हाय! तेरे भैया से कहीं ज़्यादा मोटा और लंबा है. इसने मेरी चूत को पूरी तरह खोल दिया है, जैसे कोई तिजोरी का ताला तोड़ रहा हो. लेकिन सुन, अगर तू जल्दी झड़ गया, तो मैं तुझे यहीं चबा जाऊंगी. आज मुझे तेरे इस लंड से पूरी तरह डूब जाना है, तृप्त होना है.
उनके मुँह से ‘लंड’ सुनकर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए.
मेरे दिल में एक उफान सा उठा और मैंने कहा- भाभी, आज की क्या बात? जब भी तुम बुलाओ, ये तुम्हारा सेवक तुम्हारी टांगों के बीच हाज़िर रहेगा, तुम्हारी हर ख्वाहिश को पूरा करने को बेताब!
मेरी बात सुनते ही भाभी ने मेरे होंठों को इस तरह काट लिया, जैसे वह मेरी सारी हिम्मत चूस लेना चाहती हों.
फिर वे बोलीं- ऐसे चोद मुझे कि मैं अपने पति को भूल जाऊं और हर बार सिर्फ अपने देवर के लंड की सवारी करूँ!
इतना कहते ही भाभी ने मेरी कमर को अपने नाज़ुक हाथों से जकड़ लिया और खुद को मेरे हवाले कर दिया.
मुझे उनका इशारा मिल गया और मैंने उनकी चूत को अपने धक्कों से रौंदना शुरू कर दिया.
इस पहले अनुभव को मैं कैसे बयान करूँ?
मेरे पास शब्द ही नहीं हैं इस आग, इस जुनून, इस मस्ती को बताने के लिए.
जैसे-जैसे उनकी चूत मेरे लंड के लिए और खुलती गई, मैं और तेज़ी से धक्के मारने लगा.
हर धक्के के साथ उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को और गहराई में खींच रही थीं.
मैंने देखा कि भाभी अब पूरी तरह खुल चुकी थीं.
उनके होंठों पर वह भोली लज्जा गायब थी; अब वहां सिर्फ एक शरारती, जंगली मुस्कान थी, जो मेरे दिल को चीर रही थी.
उनकी आंखों में एक आग थी, जो मुझे और तेज़ चोदने का हुक्म दे रही थी.
मैं पहले ही झड़ चुका था, तो कोई डर नहीं था.
उनकी चूत अब पूरी तरह मेरे लंड के लिए खुल चुकी थी.
भाभी भी नीचे से अपनी गोल-मटोल गांड उठा-उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थीं.
लेकिन तभी कुछ पलों में भाभी फिर से अकड़ने लगीं.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और झड़ने लगीं.
उनके नाखून मेरी गांड में धंस गए और वे मेरे कंधे को काटने लगीं.
उनका गर्म रस मेरे लंड पर बहने लगा और उस गर्मी ने मुझे मेरे मर्द होने का अहसास कराया.
मेरे सीने में गर्व की लहर दौड़ गई.
झड़ने के बाद भी भाभी हांफते हुए बोलीं- रुकना नहीं, मेरे राजा. मुझे और चाहिए. आज तो मुझे पता चलेगा कि मेरे देवर की कमर में कितना दम है.
मैंने हंसते हुए कहा- अब तो मान लो, भाभी कि मैं बुद्धू नहीं हूँ!
भाभी ने मेरी आंखों में देखकर कहा- कौन कहता है तू बुद्धू है? मेरे राजा देवर ने तो सांड का लंड पाया है!
फिर वे बोलीं- तुझे मेरी गांड बहुत पसंद है ना?
उनकी बात सुनकर मैं एकदम हैरान रह गया.
ये वही भाभी थीं, जो कभी लाज की मूरत थीं और आज ‘लंड … सांड … गांड’ जैसे शब्द उनके मुँह से ऐसे निकल रहे थे, जैसे वे कोई रसीला गीत गा रही हों.
मैंने पूछा- आपको कैसे पता?
वे हंसते हुए बोलीं- मुझे सब पता है, मेरे प्यारे. मेरी साड़ी कितनी ढीली हो, फिर भी तेरी नज़र मेरे दूधों या कमर पर नहीं, मेरी गांड पर ही क्यों ठहरती है? बोल, देखेगा मेरी गांड का जादू?
मैंने बच्चे की तरह सिर हिलाया.
भाभी ने मुझे अपने से अलग किया, मेरे गाल को काटा और फिर एक पल को अपनी चूत पर नज़र डालकर मुस्कुराईं.
फिर वे बेड पर कुतिया की तरह झुक गईं, अपनी गांड को मेरे सामने नचाने लगीं.
पीछे से उनकी गांड का नज़ारा देखकर मैं तो पागल हो गया.
वह गोल, रसीली गांड मेरे सामने थी, जैसे कोई मखमली सपना.
मैंने उसे सहलाना शुरू किया, चूमने लगा, चाटने लगा और जगह-जगह हल्के से काटने लगा.
मैं इतना खो गया कि बिना सोचे-समझे उनकी गांड के छेद को चाटने लगा.
भाभी सिहर उठीं और उछल-उछलकर अपनी गांड मेरे मुँह पर मारने लगीं जैसे वे मुझे और गहराई में डुबो देना चाहती हों.
‘अब चाटना छोड़, मेरे राजा और अपना लंड डाल दे! मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा!’
भाभी ने एक मादक सिसकारी के साथ कहा.
उनकी आवाज़ में वह तड़प थी जो मेरे रगों में आग लगा रही थी.
मैंने उनकी चूत को एक गहरा, भूखा चुम्बन दिया और शरारत से पूछा- गांड में ही लंड डालूँ ना?
मेरी बात सुनते ही भाभी की आंखों में एक पल को डर की चमक उभरी.
उनकी चूत ने तो मेरे लंड को लेने में ही इतनी सिहरन महसूस की थी; गांड का तो सवाल ही नहीं उठता था.
‘इतनी जल्दी मेरी गांड थोड़े ही मिलेगी, मेरे शैतान!’ उन्होंने हंसते हुए कहा.
मैं थोड़ा नाराज़ हुआ, मगर उनकी वह मुस्कान मेरे गुस्से को पिघला गई.
‘ठीक है!’ कहते हुए मैंने उनकी चूत में अपने लंड को पूरी ताकत से ठूँस दिया.
भाभी की चीख हवा में गूँज उठी, जैसे मैंने उनकी रूह को छू लिया हो.
मैंने उनकी कमर को अपने मजबूत हाथों से जकड़ लिया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा.
भाभी बिस्तर पर लेटी थीं और मैं खड़ा होकर उनकी चूत को रौंद रहा था, हर धक्के में उनकी सांसें मेरे साथ ताल मिला रही थीं.
भाभी ने अपनी आंखों में जुनून भरे हुए कहा- कमर से हाथ हटा और मेरे दूध दबा, मेरे सांवरिया! मैं खुद अपनी कमर हिलाकर तुझे जन्नत दिखा दूँगी.
उनकी बात सुनते ही मैंने उनकी आज्ञा मानी.
उनके गोल, रसीले दूधों को दबाते हुए मैं उनके जिस्म को चूमने-काटने लगा.
तभी भाभी ने मुझे रोका- अरे, मेरे जिस्म पर कोई निशान मत छोड़! वरना तेरे भैया को क्या जवाब दूँगी?
भैया का नाम सुनते ही मेरे दिल में एक आग-सी भड़क उठी.
मैंने गुस्से में उनकी निप्पल को जोर से निचोड़ दिया.
भाभी तड़प उठीं और बोलीं- क्या बात है? भैया की अमानत का सुख तो चाहिए, पर उनका नाम भी नहीं सुनना?
मैंने उनकी आंखों में देखकर कहा- अब तुम उन्हें भूल ही जाओ, भाभी. आज से तुम सिर्फ अपने इस लाड़ले देवर के लंड की सैर करोगी.
मेरी बात सुनकर उनकी आंखों में एक शरारती चमक उभरी, जैसे वह मेरे इस जुनून को और भड़काना चाहती हों.
डॉगी पोजीशन में मेरा लंड उनकी चूत की गहराइयों को चीरता हुआ अन्दर तक जा रहा था.
हर धक्के के साथ उनकी चूत मुझे और गहराई में खींच रही थी.
भाभी इस आग को ज़्यादा देर बर्दाश्त न कर सकीं और एक बार फिर झड़ने लगीं.
उनका गर्म रस मेरे लंड को भिगो रहा था और उनकी सिसकारियां मेरे कानों में मिश्री घोल रही थीं.
जब वे झड़ चुकीं, तो मैंने अपना लंड बाहर खींचा और उनकी जांघों पर बहे उनके रस को चाटने लगा जैसे वह कोई अमृत हो.
मैं पहले ही उनके मुँह में झड़ चुका था, तो अभी मेरा होने को नहीं था.
मेरी सांसें तेज़ थीं और ये देख भाभी ने मुझे बिस्तर पर लेटने का इशारा किया.
मैंने हंसते हुए पूछा- मैं लेट गया तो तुम्हें चोदूँगा कैसे?
भाभी ने एक कातिलाना मुस्कान के साथ कहा- अरे बुद्धू! अब मैं तुझे चोदूँगी.
इतना कहते ही वे मेरे ऊपर चढ़ गईं.
जब भाभी मेरे ऊपर बैठकर मेरे लंड को अपनी चूत में धीरे-धीरे ले रही थीं, वह नज़ारा मेरे लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं था.
उनकी चूत मेरे लंड को मखमल-सी नर्मी से लपेट रही थी और उनके चेहरे पर एक तृप्ति की चमक थी, जैसे वह हर पल को जी रही हों.
उनके बड़े, गोरे दूध मेरे सामने हिल रहे थे, उनकी सपाट नाभि और गहरी नाभि मेरे दिल को चुरा रही थी और मेरे लंड का उनकी चूत में मक्खन-सा फिसलना … हाय! वह नज़ारा आज भी मेरे होश उड़ा देता है.
उस दृश्य को लिखते वक्त भी मेरा लंड लोहे-सा तन गया है, जैसे वह फिर से भाभी की चूत की गर्मी माँग रहा हो.
भाभी ने मेरी छाती पर अपने नाज़ुक हाथ रखे और चोदन नृत्य शुरू किया.
मैं नीचे से उनकी कमर को पकड़कर धक्के मार रहा था, हर धक्के में उनकी चूत को और गहराई तक चूम रहा था.
इस पोजीशन में उनके जिस्म के साथ खेलने का पूरा मौका था.
नीचे उनकी चूत की कुटाई चल रही थी और ऊपर मैं उनके होंठों को चूम रहा था, उनके दूधों को सहला रहा था और उनकी चूचियों के निप्पल्स को हल्के से निचोड़ रहा था.
मेरे दोनों हाथ उनके जिस्म को सहलाने के लिए आज़ाद थे और मैं हर इंच को प्यार से छू रहा था.
इतनी देर की कुटाई के बाद मेरा लंड भी बांध तोड़ने को बेताब हो उठा.
मैंने हांफते हुए कहा- भाभी, लगता है मेरा निकलने वाला है.
वाइल्ड भाभी फक करती हुई सिसकते हुए बोलीं- अभी नहीं … अभी नहीं … माँ … आ … आह … ह … ह …!
तभी वे फिर से झड़ गईं.
उनकी चूत ने मेरे लंड को इस कदर जकड़ लिया, जैसे वह उसे कभी छोड़ना ही न चाहती हो.
उस जकड़न ने मेरे लंड को और सख्त कर दिया.
जब भाभी को लगा कि मेरा होने वाला है, उन्होंने वापस अपनी गति और तेज़ कर दी.
एकदम से वे मेरे लंड को अपनी चूत की गहराई में लेकर ऐसे बैठ गईं, जैसे वह मुझसे सब कुछ ले लेना चाहती हों.
मेरा वीर्य उनकी चूत में फव्वारे-सा छूटने लगा और मेरी आंखों के सामने एक पल को अंधेरा छा गया.
मैं हांफ रहा था और भाभी मेरी ओर देखकर एक कातिलाना मुस्कान बिखेर रही थीं जैसे वह मेरे इस समर्पण पर विजय पा चुकी हों.
उनकी वह मुस्कान, नशीली आंखें और उनकी गर्म चूत की जकड़न … ये सब मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गया.
भाभी मेरे चेहरे के भावों को पढ़ रही थीं और उनकी आंखों में एक चमक थी, जैसे वे मेरे हर हाव-भाव में अपनी जीत देख रही हों.
वह सुख, जो वे अपने पति को देना चाहती थीं, आज अपने लाड़ले देवर को दे रही थीं.
हर सिसकारी, हर स्पर्श, हर तड़प के साथ. मेरा गाढ़ा, गर्म रस उनकी चूत ने पूरी तरह समेट लिया था जैसे वह मेरे हर अंश को अपने अन्दर संजो लेना चाहती हों.
फिर वे धीरे से मेरे ऊपर लेट गईं, उनकी नर्म सांसें मेरी छाती पर रेंग रही थीं और उनके दूध मेरे सीने से चिपक गए मानो वह मेरी रूह को गले लगा रहे हों.
जब मेरा होश धीरे-धीरे लौटा, तब भाभी ने मेरी आंखों में झांकते हुए पूछा- कैसा लगा मेरे राजा, ये नया अनुभव?
उनकी आवाज़ में एक मादक मिठास थी, जो मेरे दिल को फिर से पिघला रही थी.
मैंने हंसते हुए कहा- आज समझ आया भाभी कि औरत की टांगों के बीच स्वर्ग का सुख क्या होता है. वह आग, वह जादू, वह तड़प, जो बस तुम दे सकती हो!
मेरी बात सुनकर भाभी की हंसी छूटी और वे मेरी नाक को प्यार से चिमटी लेने लगीं, जैसे मैं कोई शरारती बच्चा हूँ.
उधर मेरे हाथ उनकी रसीली जांघों और गोल-मटोल गांड पर फिसलने लगे.
हर स्पर्श में उनकी नर्मी को सहलाते हुए, जैसे मैं उनकी त्वचा का हर कोना चूमना चाहता हूँ.
हम उसी पोजीशन में एक-दूसरे में खोए रहे.
मैंने उनके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया और हमने एक गहरा, नशीला चुम्बन साझा किया, जो इतना लंबा चला कि समय ठहर सा गया.
मेरे हाथ उनके जिस्म पर घूम रहे थे. कभी उनके दूधों को सहलाते, कभी उनकी कमर को थामते, कभी उनकी जांघों को चूमते.
हर स्पर्श में एक नया जुनून जाग रहा था.
कुछ देर बाद मैंने शरारत से पूछा- भाभी, एक बार फिर से जन्नत की सैर करें?
मेरी बात सुनकर भाभी ने हल्के से मेरे गाल पर एक चपत लगाई और हंसती हुई बोलीं- बदमाश कहीं का! तूने तो आज मेरे जिस्म की सारी ताकत निचोड़ ली है. मेरी रूह तक थरथरा रही है तेरे इस जुनून से!
उनकी वह शरारती हंसी, वह प्यार-भरी फटकार … सब कुछ मेरे दिल को और गर्म कर रहा था.
हम दोनों उसी पोजीशन में एक-दूसरे से लिपटे रहे, उनकी गर्मी मेरे जिस्म में समाती रही.
पता ही नहीं चला कि कब उनकी सांसों की लय और मेरे दिल की धड़कनों ने हमें एक गहरी, सुकून-भरी नींद में खींच लिया.
वह नींद ऐसी थी, जैसे हम दोनों किसी सपनों के जहान में एक-दूसरे के होकर डूब गए हों.
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